New Delhi : चुनाव आयोग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के और केवल ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से नहीं हटाया जा सकता।
चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। इसमें संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया जाता है। आयोग ने कहा कि कोई भी आम नागरिक ऑनलाइन माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं हटा सकता।
राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में दावा किया था कि कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र से 6 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दावा गलत और बेबुनियाद है।
आयोग ने राहुल गांधी द्वारा दिए गए उदाहरण पर भी स्पष्टीकरण दिया। उसने कहा कि 2023 में कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के नाम हटाने का एक असफल प्रयास जरूर हुआ था, लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई, स्वयं चुनाव आयोग ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई और जांच शुरू कराई। आयोग ने बताया कि उस समय किसी भी मतदाता का नाम आधिकारिक रूप से सूची से नहीं हटाया गया था।
आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि 2023 के चुनाव में आलंद सीट से कांग्रेस नेता बी.आर. पाटिल ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2018 में भाजपा के सुभाध गुट्टेदार ने यह सीट जीती थी। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने का कोई भी निर्णय केवल नियमों के तहत और निष्पक्ष जांच के बाद ही लिया जाता है।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे जनता के बीच गलत संदेश न फैलाएं और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में तथ्यों की जांच के बाद ही बयान दें। आयोग ने यह भी दोहराया कि मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।



