Religion & Spirituality Desk: अप्रैल की चिलचिलाती धूप ने अभी से लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है, लेकिन असली परीक्षा मई के अंत में होने वाली है। इस साल 25 मई से 2 जून तक ‘नौतपा’ का प्रभाव रहेगा। ज्योतिष और विज्ञान दोनों के नजरिए से ये 9 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है। भले ही नौतपा में धरती ‘आग का गोला’ बन जाती है, लेकिन पुरानी कहावत है— “तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय”। यानी इन नौ दिनों में जितनी अधिक तपिश होगी, मानसून उतना ही बेहतर रहेगा।

सूर्य देव और मानसून का गहरा रिश्ता— वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो नौतपा में पड़ने वाली भीषण गर्मी समंदर के पानी को वाष्प में बदलकर मजबूत बादल बनाने में मदद करती है। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अच्छी फसल और खुशहाली के लिए किसान और आम लोग इन दिनों सूर्य देव की विशेष उपासना करते हैं। माना जाता है कि सूर्य देव को प्रसन्न करने से न केवल गर्मी के कुप्रभाव से राहत मिलती है, बल्कि प्रकृति भी शांत होकर अमृत रूपी वर्षा करती है।

पुण्य लाभ और सूर्य उपासना के उपाय— नौतपा के दौरान सूर्योदय से पहले स्नान कर तांबे के लोटे से अर्घ्य देना विशेष फलदायी है। इसके साथ ही आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। दान-पुण्य की दृष्टि से ज्येष्ठ माह में मिट्टी के मटके, गुड़, घी और लाल कपड़े का दान 100 गुना अधिक पुण्य देता है।

हां, एक खास बात यह भी है कि सूर्य को ‘पिता’ का कारक माना जाता है। जो लोग अपने पिता का सम्मान करते हैं, उन पर सूर्य देव की कृपा सदैव बनी रहती है। पक्षियों के लिए परिंडे (पानी का पात्र) रखना और गरीबों को शीतल जल पिलाना इस समय का सबसे बड़ा पुण्य है, जिससे प्रकृति प्रसन्न होकर झमाझम बारिश के योग बनाती है।

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