Travel News in India : दक्षिण भारत में भी बर्फ जैसा अनुभव मिल सकता है- और वह भी बिना लंबी यात्रा किए। आंध्र प्रदेश का छोटा-सा गांव लांबासिंगी, जिसे लोग प्यार से ‘आंध्र का कश्मीर’ कहते हैं, सर्दियों में ऐसा ही चमत्कार दिखाता है। यहां का तापमान कई बार शून्य से भी नीचे चला जाता है और पूरी घाटी पाले की सफेद चादर में लिपटी दिखाई देती है।
सर्दियों में लांबासिंगी का जादू
नवंबर से जनवरी तक यहां की ठंड अलग ही एहसास देती है। सुबह उठकर जब लोग बाहर निकलते हैं, तो कोहरे में ढकी पगडंडियां, पाले से चमकती घास और हल्की हवा मिलकर ऐसा दृश्य रच देती हैं कि हर फ्रेम किसी पोस्टकार्ड जैसा लगता है। कई बार गांव के किनारों पर बर्फ जैसी परतें भी दिखाई देती हैं, जो दक्षिण भारत के यात्रियों को खासा आकर्षित करती हैं।
घने जंगल, पहाड़ और कॉफी का खूबसूरत संगम
कुछ ही दूरी पर स्थित थाजंगी जलाशय यात्रियों का पसंदीदा ठिकाना है। शांत पानी और आसपास की हरियाली यहां पिकनिक, नौकायन और आराम के लिए आदर्श जगह बनाती है। वहीं कोथापल्ली झरने छोटे ट्रेक के बाद अचानक सामने आते हैं और अपनी ठंडी बौछार से सारा थकान मिटा देते हैं।
अराकू घाटी- लांबासिंगी का परफेक्ट साथी
लांबासिंगी की यात्रा अक्सर अराकू घाटी के बिना पूरी नहीं मानी जाती। दोनों जगहें एक-दूसरे की खूबसूरती को पूरा करती हैं। अराकू की आदिवासी संस्कृति, बोर्रा गुफाओं का रोमांच और घाटी की हरियाली पर्यटकों को एक सम्पूर्ण अनुभव देती है।
सैपाथर जलप्रपात भी पास में ही है, जो प्रकृति की गोद में बिताए गए शांत पलों के लिए जाना जाता है।
ट्रेकिंग, कैंपिंग और तारों भरी रातें
कब जाएं?
यहां आने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जनवरी माना जाता है, जब तापमान तेजी से गिरता है और पाला देखने को मिलता है। मानसून के दौरान भी यह जगह अपनी हरियाली के लिए मशहूर है।
लांबासिंगी अब धीरे-धीरे दक्षिण भारत का सबसे अनोखा और पसंदीदा पर्यटन स्थल बनता जा रहा है- शायद इसलिए क्योंकि यह ठंड, सुकून और सुंदरता का बेहद दुर्लभ संगम है।



