Ranchi: बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की नौकरी को आज के दौर में सबसे बेहतर माना जाता है। शानदार सैलरी और सुख-सुविधाओं के कारण युवा इन कंपनियों की ओर आकर्षित होते हैं। हालांकि, जब किसी कर्मचारी को दूसरी कंपनी से बेहतर ऑफर मिलता है, तो उसे पुरानी कंपनी छोड़ने के लिए ‘नोटिस पीरियड’ की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। नोटिस पीरियड के नियम कंपनी की पॉलिसी और देश के श्रम कानूनों पर आधारित होते हैं, जिनका पालन करना कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के लिए अनिवार्य है।
Read more: PGIMER चंडीगढ़ में इंटरव्यू से पाएं नौकरी: SRF समेत कई पदों पर भर्ती शुरू
नोटिस पीरियड की अवधि और प्रक्रिया: आमतौर पर हर रजिस्टर्ड कंपनी के अपने नियम होते हैं। जूनियर लेवल पर यह अवधि 30 दिन की होती है, जबकि सीनियर पदों पर यह 60 से 90 दिनों तक जा सकती है। यह पूरी जानकारी आपके जॉइनिंग एग्रीमेंट में स्पष्ट लिखी होती है। इस्तीफा देने के लिए ईमेल या लिखित पत्र के जरिए सूचना देनी होती है, जिसमें आपके काम के आखिरी दिन (Last Working Day) का साफ जिक्र होना चाहिए।
क्या है ‘नोटिस पीरियड बाईआउट’?: नोटिस पीरियड के दौरान कर्मचारी को सामान्य रूप से काम करना पड़ता है। यदि आप बिना नोटिस पीरियड सर्व किए कंपनी छोड़ना चाहते हैं, तो कंपनी उस अवधि की सैलरी आपसे वापस मांग सकती है या आपके बकाया पैसे से काट सकती है। इसे तकनीकी भाषा में ‘नोटिस पीरियड बाईआउट’ कहा जाता है। कुछ मामलों में कंपनी आपको समय से पहले रिलीव भी कर सकती है, लेकिन यह पूरी तरह प्रबंधन के फैसले पर निर्भर करता है।
Read more: RBI में नौकरी का सुनहरा मौका, असिस्टेंट के 650 पदों पर निकली भर्ती
कानूनी बाध्यता और सैलरी: भारत के श्रम कानूनों के अनुसार, यदि अनुबंध (Contract) में नोटिस पीरियड का जिक्र है, तो उसे मानना कानूनी रूप से जरूरी है। नोटिस पीरियड के दौरान भी कर्मचारी को पूरी सैलरी और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। जानकारों का मानना है कि पेशेवर करियर में नियमों का पालन करना न केवल कानूनी सुरक्षा देता है, बल्कि भविष्य के लिए आपके रिकॉर्ड को भी साफ रखता है।



