लंदन/रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को लंदन में यूनाइटेड किंगडम स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक विशेष स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ झारखंड के भविष्य और इसकी आर्थिक क्षमताओं पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री का यह संवाद केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि झारखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और सहयोग का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

खनिज से कौशल तक का सफर

समारोह में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड अब सिर्फ खनिजों का निर्यातक राज्य नहीं रहना चाहता। उन्होंने राज्य की युवा शक्ति, मानव संसाधन की क्षमताओं और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के क्षेत्र में झारखंड की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “झारखंड की खनिज संपदा और ऊर्जा-संक्रमण (Energy Transition) में इसकी भूमिका पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।”

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक अवसर

संवाद के दौरान उच्च शिक्षा, कौशल विकास और खेलों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी और अन्य वैश्विक प्रतिनिधियों को बताया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी से झारखंड के युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार और शोध के अवसर मिल सकेंगे। चर्चा में यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी के तहत राज्य के सांस्कृतिक संरक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान के फ्रेमवर्क को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

झारखंड @25 : एक वैश्विक पहचान

राज्य की स्थापना के 25वें वर्ष के अवसर पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय दौरा झारखंड के विकास मॉडल “प्रकृति के साथ प्रगति” को दुनिया के सामने पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के संवादों से न केवल निवेश के नए द्वार खुलेंगे, बल्कि शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में झारखंड एक ‘नॉलेज हब’ बनकर उभरेगा।

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