रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। सदन में जब श्रम, नियोजन, कौशल विकास एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई, तो पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव ने राज्य की आर्थिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आंकड़ों के साथ यह स्पष्ट किया कि झारखंड प्राकृतिक संपदा के मामले में देश के समृद्धतम राज्यों में से एक है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ का युवा आज भी रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

खनिज संपदा का धनी, पर विकास की डगर कठिन

विधायक प्रदीप यादव ने चर्चा के दौरान कहा कि खान-खनिज के मामले में झारखंड पूरे देश में दूसरे स्थान पर है और कोयला उत्पादन में तो हमारा राज्य सबसे अग्रणी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस राज्य की जमीन सोना और कोयला उगलती हो, वहां के युवाओं को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी क्यों करनी पड़ रही है? उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड में विकास की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन संसाधनों का सही प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर उद्योगों का जाल न बिछ पाना सबसे बड़ी चुनौती है।

केंद्र की नीतियों पर साधा निशाना

प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार की औद्योगिक नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की बदहाली का जिक्र करते हुए HEC (Heavy Engineering Corporation) का उदाहरण दिया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि ‘मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज’ कहा जाने वाला HEC आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। वहां के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जो केंद्र की गलत नीतियों का परिणाम है।

समाधान की राह : नए उद्योग और नीतिगत बदलाव

विधायक ने सरकार को सुझाव दिया कि जब तक औद्योगिक रोजगार को बढ़ावा देने वाली ठोस नीतियां नहीं बनेंगी, तब तक बेरोजगारी का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि झारखंड को केवल ‘रॉ मटेरियल’ सप्लाई करने वाला राज्य न बनाकर, यहाँ ‘वैल्यू एडिशन’ और नए उद्योगों की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए। देश जिस आर्थिक मंदी और बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है, उससे निपटने के लिए झारखंड को अपनी खनिज संपदा का उपयोग खुद के युवाओं के भविष्य संवारने में करना होगा।

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