Ranchi News : झारखंड के महान नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से पूरा राज्य शोक में है। उनकी अंतिम विदाई पर राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी भावुक हो गए और सोशल मीडिया के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
सांसद परिमल नथवाणी ने कहा कि दिशोम गुरुजी केवल आदिवासियों और वंचित वर्गों के ही नेता नहीं थे, बल्कि वे समाज के हर वर्ग की भलाई चाहते थे। उन्होंने हमेशा झारखंड के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया। नथवाणी ने कहा, “गुरुजी समाज के सभी तबकों को समान दृष्टि से देखते थे और हर किसी के लिए न्याय और समानता की लड़ाई लड़ते रहे। उनका जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।”
गुरुजी के निधन की खबर सुनते ही नथवाणी तुरंत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास पहुंचे और उनसे मिलकर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्तिगत रूप से प्रकट कीं। उन्होंने कहा, “मैंने हेमंत सोरेन में सिर्फ एक शोक संतप्त पुत्र ही नहीं देखा, बल्कि अपने पिता की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले एक कर्मठ और समर्पित नेता की छवि भी देखी। वे अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।”
नथवाणी ने भावुक होकर कहा कि वे झारखंड में एक बाहरी और निर्दलीय सांसद होते हुए भी दिशोम गुरुजी और हेमंत सोरेन से हमेशा स्नेह, सौहार्द और सहयोग प्राप्त करते रहे। उन्होंने कहा, “गुरुजी के मार्गदर्शन और सहयोग के बिना मैं झारखंड के विकास में अपना योगदान नहीं दे पाता। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता ने राज्य की नींव को मजबूत किया।”
दिशोम गुरुजी की सामाजिक चेतना, आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष और राज्य के विकास के लिए उनके योगदान को याद करते हुए नथवाणी ने कहा, “गुरुजी की विरासत हमेशा झारखंडवासियों के दिलों में जीवित रहेगी। उनकी आत्मा की शांति के लिए मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।”
गुरुजी के निधन पर नथवाणी लगातार सोशल मीडिया पर भी अपनी भावनाएं साझा कर रहे हैं। उन्होंने कई पोस्ट में गुरुजी को एक महान नेता, समाज सुधारक और प्रेरणास्रोत बताया है।
झारखंड की राजनीति और समाज पर दिशोम गुरुजी का प्रभाव अमिट है। उनके सपनों को साकार करने का संकल्प न केवल हेमंत सोरेन बल्कि झारखंड की नई पीढ़ी भी लेकर चल रही है।



