Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में सुधार के लिए चल रहे स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान सरकार को कड़ा निर्देश जारी किया है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि 30 सितंबर 2025 तक जेलों में सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां पूरी की जाएं। अदालत ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि इस समय सीमा का पालन हो।

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 में ही हाईकोर्ट ने सरकार को जेलों में 80 प्रतिशत रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया था। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि हर सुनवाई में सरकार की ओर से जल्द नियुक्ति का आश्वासन दिया जाता है, मगर हकीकत में कार्रवाई नहीं हो रही है।

अदालत ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई और कहा कि जेलों की स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन होना अनिवार्य है। रिक्त पदों के कारण जेलों में प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे कैदियों के पुनर्वास और सुरक्षा कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पदों की नियुक्ति के लिए जो भी प्रशासनिक प्रक्रिया आवश्यक है, उसे तत्काल पूरा किया जाए। अदालत ने याद दिलाया कि पूर्व में दिए गए आदेश के बाद सरकार ने आदर्श जेल मैनुअल लागू किया था, जो जेल प्रबंधन में सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम था। अब आवश्यकता है कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2025 को होगी। तब तक अदालत यह देखेगी कि सरकार ने अपने आदेश के पालन में क्या प्रगति की है। हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ है कि राज्य में जेल सुधार को लेकर अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी।

Share.
Exit mobile version