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रांची: झारखंड की सियासत में लाल झंडे की सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आगामी 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली विशाल रैली के लिए कमर कस ली है। राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि इस बार झारखंड से मजदूरों और किसानों का एक बड़ा हुजूम देश की राजधानी में अपनी आवाज बुलंद करेगा।
दो जत्थों से शुरू होगा संघर्ष का सफर
पार्टी ने राज्य में जनसंपर्क के लिए दो विशेष ‘केंद्रीय जन आक्रोश जत्था’ तैयार किए हैं। पहला जत्था शनिवार को वीर बुधु भगत के ऐतिहासिक स्मारक सिलागाई से अपनी यात्रा शुरू करेगा। वहीं, दूसरा जत्था संताल परगना के हृदय स्थल दुमका में सिदो-कान्हो के चरणों में मत्था टेककर रवाना होगा। इन जत्थों का मकसद केवल दिल्ली जाना नहीं, बल्कि रास्ते भर गांव-गांव में लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जगाना है।
किन मुद्दों पर मचेगा घमासान?
माकपा इस रैली के जरिए केंद्र सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। पार्टी की मांगों की सूची लंबी है, जिसमें प्रमुख हैं:
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चार नए लेबर कोड को तुरंत रद्द करना।
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मनरेगा को कागजों से निकालकर जमीन पर प्रभावी बनाना।
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विवादास्पद बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक की वापसी।
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बढ़ती महंगाई पर लगाम और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार।
दिग्गज नेताओं की अगुवाई में होगा प्रदर्शन
दिल्ली में होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन का नेतृत्व केवल स्थानीय नेता ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज भी करेंगे। माकपा की वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात और सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता के मार्गदर्शन में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को केंद्र के कानों तक पहुंचाएगा।
प्रकाश विप्लव के अनुसार, कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह समझा रहे हैं कि कैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और बदलती नीतियां आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं। पार्टी का मानना है कि यह रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के अन्नदाताओं और श्रमवीरों के सम्मान की लड़ाई है।

