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रांची: झारखंड की राजधानी रांची, जिसे ‘सफेद संगमरमर’ और झरनों का शहर कहा जाता है, आज दिनदहाड़े गुंडागर्दी और पुलिसिया सुस्ती का गवाह बनी। घटना गुरुवार, 5 मार्च 2026 की है, जब कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम (पंचवटी प्लाजा के सामने) में कुछ असामाजिक तत्वों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया।
क्या है पूरी घटना?
दोपहर के लगभग 2:40 बजे, जब स्टेडियम परिसर में लोग धूप और शांति का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक कुछ असामाजिक लड़कों का झुंड वहां पहुंचा। चश्मदीदों के अनुसार, इन लड़कों ने वहां बैठे एक युवक और युवती को निशाना बनाया और उनके साथ बेहद बर्बरता से मारपीट शुरू कर दी। हमलावर इतने बेखौफ थे कि उन्हें भीड़ या कानून का कोई डर नहीं था।
वर्दी पर सवाल : ‘मूकदर्शक’ बनी रही महिला सिपाही
इस घटना का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जिस वक्त यह मारपीट हो रही थी, वहां एक महिला कांस्टेबल भी मौजूद थी। उपस्थित लोगों का आरोप है कि वर्दी में होने के बावजूद उन्होंने बीच-बचाव करने या हमलावरों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। वह एक ‘मूकदर्शक’ की तरह पूरी घटना को देखती रहीं, जिससे पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हेल्पलाइन 112 की खुली पोल
सुरक्षा के दावों की हवा तब निकल गई जब एक जागरूक नागरिक ने दोपहर 2:45 बजे आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल कर घटना की जानकारी दी। विडंबना देखिए कि शहर के बीचों-बीच, जहां से थाना और पुलिस चौकियां बेहद करीब हैं, आधे घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की कोई पीसीआर या टीम मौके पर नहीं पहुंची।
जनता में भारी आक्रोश
स्टेडियम में मौजूद लोगों का कहना है कि अगर राजधानी के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण कचहरी रोड इलाके में आम नागरिक सुरक्षित नहीं है, तो बाकी शहर का क्या हाल होगा? लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” और “सुरक्षित झारखंड” जैसे नारे जमीन पर खोखले साबित हो रहे हैं। पुलिस की इस लेट-लतीफी ने अपराधियों के हौसले पस्त करने के बजाय उन्हें शह देने का काम किया है। अब देखना यह है कि क्या रांची पुलिस इन हमलावरों की पहचान कर कार्रवाई करती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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