India News: भारत जिसे अब तक दुनिया का सबसे युवा देश कहा जाता था, वह अब तेजी से बुढ़ापे की ओर कदम बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने देश के भविष्य की एक अलग तस्वीर दिखाई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में खुलासा किया कि साल 2011 में देश में जो बुजुर्गों (60 साल से अधिक) की संख्या 10.16 करोड़ थी, वह साल 2036 तक बढ़कर 22.74 करोड़ हो जाएगी। यानी आने वाले समय में हर 7 में से 1 भारतीय बुजुर्ग होगा।
इस बढ़ती संख्या के साथ ही स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक निर्भरता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सिर उठा रही हैं।
संयुक्त परिवारों का अंत और अकेलेपन का दर्द
सरकार ने स्वीकार किया है कि आधुनिकता की दौड़ में संयुक्त परिवारों का ढांचा टूट रहा है। पहले जहां बुजुर्गों की देखभाल पूरा परिवार मिलकर करता था, अब छोटे परिवारों के कारण उनकी जिम्मेदारी कम लोगों पर आ गई है। इसका सबसे भयावह रूप केरल में देखने को मिल रहा है, जहां 16.5 प्रतिशत आबादी बुजुर्ग है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 12 लाख घरों में ताले लटके हैं क्योंकि युवा काम के सिलसिले में बाहर हैं, और 21 लाख घरों में सिर्फ बुजुर्ग अकेले रहने को मजबूर हैं।
बुजुर्गों की इन जरूरतों को देखते हुए मोदी सरकार ने ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ (ABYAY) लागू की है। साथ ही एक नेशनल काउंसिल ऑफ सीनियर सिटीजन का गठन किया गया है जो बुजुर्गों के मुद्दों पर सरकार को सलाह देती है। हालांकि, सरकारी योजनाओं के बावजूद बदलते सामाजिक ताने-बाने ने बुजुर्गों के लिए ‘अपनों का साथ’ एक लग्जरी बना दिया है।



