New Delhi: केंद्र सरकार ने देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना की रूपरेखा संसद में पेश कर दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, जातिगत गणना को लेकर किसी भी भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसके लिए विशिष्ट सवाल दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले अधिसूचित (Notify) किए जाएंगे।

कब शुरू होगी प्रक्रिया?

योजना के अनुसार, जनसंख्या की वास्तविक गिनती का मुख्य कार्य फरवरी 2027 में शुरू होगा। हालांकि, दुर्गम इलाकों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड) में भौगोलिक चुनौतियों के कारण यह काम सितंबर 2026 में ही शुरू कर दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी।

पहला चरण: मकानों की गिनती और 33 सवाल

जनगणना का पहला चरण ‘मकान सूचीकरण’ (हाउसलिस्टिंग) का होगा, जो इसी साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच संपन्न होगा। इसके लिए 33 सवालों की सूची जारी की गई है, जिसमें घर की बनावट, पेयजल, बिजली, अनाज का प्रकार और वाहनों जैसे विवरण शामिल होंगे। नागरिकों को इसमें एक विशेष सुविधा भी मिलेगी; वे हाउसलिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले स्वयं ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे।

जाति जनगणना पर छिड़ा सियासी घमासान

सरकार ने भले ही दूसरे चरण में जातिगत डेटा जुटाने की बात कही है, लेकिन विपक्ष ने इस पर मोर्चा खोल दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ धोखा करार देते हुए कहा कि मौजूदा नोटिफिकेशन में जाति का कॉलम ही नहीं है। कांग्रेस ने भी प्रक्रिया की मंशा पर सवाल उठाए हैं। जवाब में सरकार ने दोहराया है कि जाति जनगणना के लिए अलग से अधिसूचना जारी होगी और यह जनगणना के दूसरे चरण का अनिवार्य हिस्सा होगी।

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