Ranchi : रांची में जश्ने आमदे रसूल और ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूसे मोहम्मदी बड़े ही अकीदत, एहतराम और आपसी भाईचारे के साथ निकाला गया। सुन्नी बरैलवी सेंट्रल कमिटी और एदारा-ए-शरीया झारखंड के नेतृत्व में यह जुलूस इस्लामी मरकज रांची से शुरू होकर शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए रेसालदार बाबा दरगाह उर्स मैदान में समाप्त हुआ।
जुलूस में हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। हिन्दपीढ़ी, ग्वाला टोली, हरमू, गाड़ीखाना, पुरानी रांची, कांटाटोली, थड़पखना, लालपुर, कडरू, पुंदाग समेत दर्जनों इलाकों से निकले जुलूस पूर्व निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए एकजुट हुए। जगह-जगह विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत फूल बरसाकर और लंगर-इफ्तार का आयोजन कर किया।
कार्यक्रम की सरपरस्ती मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी और मौलाना ताजुद्दीन ने की, जबकि महासचिव अकीलुर्रहमान, प्रवक्ता मोहम्मद इसलाम और अन्य कमिटी के पदाधिकारियों ने निगरानी की। इस अवसर पर मौलाना रिजवी और मौलाना ताजुद्दीन ने पैगम्बर मोहम्मद ﷺ की जीवनी पर रोशनी डालते हुए अमन, मोहब्बत और इंसानियत के रास्ते पर चलने का आह्वान किया।
रेसालदार बाबा दरगाह उर्स मैदान में उलेमाओं के साथ-साथ विभिन्न धर्मों के प्रमुख लोग और राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने संबोधित करते हुए कहा कि जुलूसे मोहम्मदी अमन और भाईचारे का अद्भुत संदेश देता है, जिससे नफरत फैलाने वालों को सबक लेना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम और सामूहिक दुआ की गई। इस अवसर पर मौलाना तहजीबुल हसन ने सुन्नी बरैलवी सेंट्रल कमिटी के प्रमुख पदाधिकारियों को मोमेंटो देकर रहमते आलम अवॉर्ड से नवाजा।
जुलूस में मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी, मौलाना ताजुद्दीन, मुफ्ती जमील, कारी अय्यूब, मौलाना शेर मोहम्मद कादरी, परवेज आलम, मोहम्मद तौहीद सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और पूरा शहर “जश्ने आमदे रसूल” के नारों से गूंज उठा।



