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रांची: झारखंड की ब्यूरोक्रेसी और सियासत में भूचाल लाने वाले हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में एक नया मोड़ आया है। राज्य के कभी सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले निलंबित IAS विनय चौबे ने जेल की सलाखों से बाहर आने के लिए झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई हुई, जिसने एक बार फिर प्रदेश की प्रशासनिक शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत की कार्रवाई : ACB को मिला अल्टीमेटम
सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एस. मजूमदार ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मामले में जांच की प्रक्रिया और जमानत की कानूनी शर्तों को ध्यान में रखते हुए राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल कोई भी फैसला सुनाने के बजाय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब ACB के जवाब के आधार पर ही यह तय होगा कि विनय चौबे को राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
क्या है ‘हजारीबाग वन भूमि’ का काला खेल?
यह मामला किसी सामान्य जमीन विवाद का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। ACB की जांच के अनुसार, जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) थे, तब लगभग 5000 एकड़ से अधिक वन भूमि, ट्रस्ट की जमीन और गैर-मजरुआ भूमि की अवैध तरीके से जमाबंदी की गई और उसकी खरीद-बिक्री का खेल रचा गया।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस पूरे घोटाले में सरकारी दस्तावेजों के साथ न केवल छेड़छाड़ की गई, बल्कि ‘सेवायत’ जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को रिकॉर्ड से हटाकर निजी लाभ के लिए जमीन का हस्तांतरण किया गया। इस खेल में तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) से लेकर कई रसूखदार ब्रोकर और सफेदपोश लोग शामिल थे।
रिश्तेदार और रसूखदार : आरोपियों की लंबी फेहरिस्त
ACB ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसमें विनय चौबे की पत्नी स्निग्धा सिंह, उनके करीबी विनय सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद और तत्कालीन CO शैलेश कुमार जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ACB का आरोप है कि इस घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं।
ब्यूरोक्रेसी के लिए सबक?
विनय चौबे पहले से ही शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। हजारीबाग का यह मामला उनके करियर और छवि के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पहले ही उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें तत्कालीन अफसरों के बयान भी शामिल हैं।
अब सबकी निगाहें उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। क्या ACB के पास विनय चौबे के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं या अदालत उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश देगी? यह सवाल झारखंड के गलियारों में तैर रहा है।

