Jharkhand News: झारखंड में शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी विनय चौबे और तत्कालीन संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह से अब ACB (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की टीम दो दिनों तक पूछताछ करेगी। रिमांड की अवधि 29 मई सुबह 10 बजे से शुरू होकर 31 मई सुबह 10 बजे तक जारी रहेगी। इसके बाद दोनों आरोपियों को फिर से ACB कोर्ट में पेश किया जाएगा।
बुधवार को विशेष ACB अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों अधिकारियों की दो दिन की रिमांड मंजूर की। इससे पहले ACB ने कोर्ट से सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल दो दिन की रिमांड की अनुमति दी। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार सिंह की अदालत में आवेदन देकर दोनों अधिकारियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की अनुमति मांगी। हालांकि, इस पर अभी कोर्ट ने कोई फैसला नहीं सुनाया है। दूसरी ओर, दोनों अधिकारियों के अधिवक्ताओं ने रिमांड की मांग का कड़ा विरोध किया है।
झारखंड में 38 करोड़ रुपये का शराब घोटाला
उल्लेखनीय है कि झारखंड में करीब 38 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच ACB कर रही है। अब तक इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ACB की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है और अब जांच का दायरा भी व्यापक हो गया है।
इस घोटाले में सबसे पहले 20 मई को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे और गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को रांची स्थित ACB की विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहां से उन्हें तीन जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पहले ही हो चुकी है छह घंटे की पूछताछ
गिरफ्तारी से पहले ACB ने दोनों अधिकारियों से करीब छह घंटे तक पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद ही ACB को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई। हालांकि, ACB को अभी और जानकारी की आवश्यकता है, इसलिए अब वह दोनों से रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ करना चाहती है।
फिलहाल जानकारी के अनुसार, विनय चौबे की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें रिम्स अस्पताल में भर्ती किया गया है।
घोटाले में अब तक पांच गिरफ्तारी
इस मामले में ACB ने 22 मई की देर रात झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) रांची के क्षेत्रीय निदेशक और झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के तत्कालीन जीएम (ऑपरेशन एंड फाइनेंस) सुधीर कुमार, वर्तमान जीएम फाइनेंस सुधीर कुमार दास और निजी कंपनी मार्शन के प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था।
इन गिरफ्तारियों के बाद से स्पष्ट है कि यह घोटाला सरकारी और निजी साझेदारी से जुड़ा एक बड़ा मामला है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
क्या है घोटाले का मामला?
इस घोटाले में आरोप है कि झारखंड में शराब वितरण और बिक्री के अनुबंधों में बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार हुआ है। अनुबंधों में नियमों का उल्लंघन कर लाभकारी शर्तों पर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।
ACB को शक है कि इस पूरे मामले में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत रही है, जिससे पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार की चपेट में आ गया।



