कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से हाल ही में निलंबित हुए पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी के गठन का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
हुमायूं कबीर की नई ‘विद्रोही’ राह; बंगाल की सत्ता के लिए तैयार किया 294 सीटों का प्लान
ममता बनर्जी की पार्टी से 4 दिसंबर को बाहर किए जाने के बाद कबीर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी नई पार्टी न केवल मुर्शिदाबाद, बल्कि पूरे बंगाल की सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की ताकत रखती है।
चुनावी सिंबल और पार्टी का नाम: कांग्रेस-टीएमसी से रहेगी दूरी
हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी की रणनीति साझा करते हुए कहा कि पार्टी के नाम में ‘कांग्रेस’ या ‘तृणमूल’ जैसे पारंपरिक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। नाम ऐसा होगा जिससे बंगाल की आम जनता खुद को जुड़ा हुआ महसूस करे। चुनाव चिन्ह के लिए उन्होंने ‘टेबल’, ‘गुलाब’ या ‘नारियल का पेड़’ जैसे विकल्पों को सामने रखा है, जिसमें टेबल उनकी पहली पसंद है। कबीर का मानना है कि उनकी पार्टी विकास और सामाजिक न्याय के एजेंडे पर काम करेगी, जो वर्तमान सरकार के विकल्प के रूप में उभरेगी।
मुर्शिदाबाद में ‘किंगमेकर’ बनने की तैयारी; विपक्षी दलों को दिया ऑफर
कबीर की रणनीति का सबसे दिलचस्प हिस्सा मुर्शिदाबाद जिला है, जहाँ की 30 सीटों पर उनका खासा प्रभाव माना जाता है। उन्होंने माकपा (CPIM), आईएसएफ (ISF) और अधीर रंजन चौधरी की कांग्रेस के सामने सीट शेयरिंग का एक फॉर्मूला रखा है। कबीर का कहना है कि अगर ये दल उनके साथ नहीं आए, तो वे अकेले चुनाव लड़कर मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर देंगे। उनका दावा है कि 2026 में उनकी पार्टी सरकार बनाने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगी।
22 दिसंबर को होगा शक्ति प्रदर्शन; 75 सदस्यों की कमेटी तैयार
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि 22 दिसंबर को हुमायूं कबीर अपनी 75 सदस्यीय राज्य समिति की घोषणा करेंगे। इसी दिन पार्टी के नाम और औपचारिक झंडे का भी अनावरण हो सकता है। जानकारों का मानना है कि हुमायूं कबीर का यह कदम खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में टीएमसी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता इस नई ‘टेबल’ पर अपनी पसंद का ‘गुलाब’ रखती है या नहीं।



