रांची: झारखंड की राजधानी रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने गौवंशीय पशुओं के अवशेषों के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पीरू टोला इलाके में की गई इस कार्रवाई ने न केवल पशु तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है, बल्कि इलाके में भारी हड़कंप और तनाव की स्थिति भी पैदा कर दी है। यह मामला एक संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो कानून की आंखों में धूल झोंककर राजधानी के आसपास अपना जाल फैलाए हुए है।
गोपनीय सूचना और पुलिस की अभेद्य घेराबंदी
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब समाजसेवी और हिंदूवादी नेता विवेक प्रताप सिंह को एक गोपनीय और पुख्ता जानकारी मिली। सूचना के अनुसार, एक छोटा हाथी वाहन (रजिस्ट्रेशन नंबर JH01GC1731) प्रतिबंधित सामग्री लेकर शहर के एक मुख्य मार्ग से गुजरने वाला था। मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए श्री सिंह ने तत्काल इसकी जानकारी वरीय पुलिस अधिकारियों को दी और त्वरित कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने भी बिना समय गंवाए चालाकी दिखाई और इलाके में मजबूत घेराबंदी की, जिसके परिणामस्वरूप वाहन को पीरू टोला के पास सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया।
वाहन के भीतर का खौफनाक नजारा
जब पुलिस ने जब्त वाहन की तलाशी ली, तो अंदर का दृश्य देख सभी दंग रह गए। वाहन के भीतर भारी संख्या में गौवंशीय पशुओं के सिर और कंकाल लदे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन में कुल तीन लोग सवार थे, जिन्हें पुलिस अपने साथ ले गई। हालांकि, पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश पांडेय ने मामले की पुष्टि करते हुए आधिकारिक तौर पर केवल एक व्यक्ति, आरिफ अंसारी (पिता- स्व. असलम अंसारी, ग्राम सुंदरो, लोहरदगा) की गिरफ्तारी की बात कही है। पुलिस के अनुसार आरिफ वाहन का चालक है और उससे पूछताछ जारी है।
लोहरदगा की ‘हड्डी फैक्ट्री’ और रसूखदारों का कनेक्शन
जांच में यह बात सामने आ रही है कि इन अवशेषों को लोहरदगा जिले के कुड़ू थाना अंतर्गत ककरगढ़ पंचायत स्थित लापुर मदरसा के पास संचालित एक संदिग्ध ‘हड्डी फैक्ट्री’ में पहुँचाया जाना था। पुलिस की सूझ-बूझ से इस खेप को मंजिल तक पहुँचने से पहले ही जब्त कर लिया गया। गोपनीय सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के पीछे कुछ बड़े नाम शामिल हैं:
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फैक्ट्री का मालिकाना हक: बताया जा रहा है कि उक्त हड्डी फैक्ट्री कांटाटोली कुरैशी मुहल्ला निवासी फरहाद कुरैशी की है।
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सिंडिकेट के अन्य चेहरे: इस अवैध व्यापार में कांटाटोली के ही गुलाम गौस उर्फ पप्पू समेत कई लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।
समाजसेवी का गंभीर आरोप: “सफेदपोशों का है यह बड़ा रैकेट”
हिंदूवादी नेता विवेक प्रताप सिंह ने पुलिस की कार्रवाई को सराहा तो है, लेकिन आरोपियों की संख्या को लेकर संशय भी जताया है। उनका स्पष्ट कहना है कि वाहन में तीन लोग सवार थे और यह प्रतिबंधित मांस व हड्डियों की तस्करी का एक बहुत बड़ा रैकेट है। इसमें राजधानी रांची के कई प्रभावशाली लोग पर्दे के पीछे से खेल रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2005 से जब झारखंड में प्रतिबंधित मांस का कटना बंद है और कोई स्लाटर हाउस ही नहीं है तो प्रतिबंधित मांस व हड्डियों का इतना बड़ा जखिरा आ कहां से रहा है? यदि पुलिस निष्पक्ष और गहन अनुसंधान करे, तो इस अवैध धंधे के मास्टरमाइंड जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।
प्रशासन की चुनौतियां और जन-आक्रोश
इतनी बड़ी संख्या में अवशेषों की बरामदगी के बाद क्षेत्र में धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि कैसे घनी आबादी वाले रास्तों से बेखौफ होकर तस्कर ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। फिलहाल, पिठोरिया पुलिस पकड़े गए चालक आरिफ से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुँचा जा सके। पुलिस का कहना है कि इस धंधे में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।
यह घटना राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और तस्करी के बढ़ते ग्राफ पर बड़े सवाल खड़े करती है। अब जनता की नजरें पुलिसिया कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या ‘छोटी मछली’ के साथ-साथ इस समंदर के ‘मगरमच्छ’ भी पकड़े जाएंगे?



