Tehran, (Iran): पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। 18 दिनों के सीजफायर के बाद तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरानी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बड़ा दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर सामान ले जा रही दो नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया है। ईरान के मुताबिक, ये आईआरजीसी (IRGC) की स्पीडबोट्स नहीं बल्कि आम मालवाहक नौकाएं थीं, जिनमें सवार पांच नागरिकों की जान चली गई है।
यूएई और बहरीन में इमरजेंसी के हालात
तनाव की आंच अब खाड़ी के अन्य देशों तक भी फैल गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जानकारी दी है कि एक ईरानी ड्रोन ने फुजैराह स्थित तेल सुविधा केंद्र में आग लगा दी है। यह केंद्र होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण पाइपलाइन हब है। इस हमले के तुरंत बाद बहरीन ने सोमवार रात ‘नेशनल इमरजेंसी’ का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही ब्रिटिश सेना ने भी अमीरात तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने की पुष्टि की है। इन सैन्य गतिविधियों के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में 6 फीसदी का भारी उछाल देखा गया है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने होर्मुज के रास्ते गुजर रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे मिटा दिया जाएगा। ट्रंप ने ईरान पर दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज पर भी हमला करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन हमलों में शामिल होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और अमेरिका को किसी भी ‘दलदल’ में फंसने से बचना चाहिए।
कूटनीतिक हल की कोशिशें
अराघची ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की कोशिशों से बातचीत आगे बढ़ रही है और इस मसले को केवल कूटनीति से ही सुलझाया जा सकता है। इस बीच, अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है ताकि जलमार्ग बाधित करने के लिए ईरान की जवाबदेही तय की जा सके। जर्मनी ने भी ईरान से बातचीत की मेज पर वापस लौटने की अपील की है।
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