Ranchi News : झारखंड सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए लगातार सक्रिय है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में तीन अहम प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनका सीधा असर राज्य के वित्तीय ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।
इस बैठक में जिन तीन मुख्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, वे हैं-
1. झारखंड वित्त (अंकेक्षण एवं लेखा) सेवा नियमावली-2025 की स्वीकृति
इस नियमावली का उद्देश्य राज्य के लेखा और अंकेक्षण से संबंधित कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। नई नियमावली के तहत अंकेक्षण अधिकारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तें, पदोन्नति, दायित्व और कार्यप्रणाली को आधुनिक और परिणाम आधारित बनाया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं पर समय रहते अंकुश लगाया जाए तो योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो सकता है। इस नियमावली से लेखा परीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक होगी, जिससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
2. झारखंड राज्य आयुष स्वास्थ्य सेवा (संशोधन) नियमावली-2024 की स्वीकृति
राज्य सरकार ने आयुष चिकित्सा क्षेत्र को सशक्त करने के लिए इस संशोधित नियमावली को मंजूरी दी है। इसमें आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध और योग पद्धति के चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति और सेवा शर्तों को अधिक पारदर्शी और कार्यकुशल बनाने पर बल दिया गया है। संशोधन के बाद अब योग्य और अनुभवी आयुष चिकित्सकों को बेहतर अवसर मिलेंगे। यह नीति राज्य में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की स्थिति को मजबूत करेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में मददगार होगी।
3. झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 की स्वीकृति
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए मंत्रिपरिषद ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 को मंजूरी दी है। इस विधेयक के तहत राज्य में एक नए विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ शोध के अधिक अवसर मिल सकेंगे। यह विश्वविद्यालय विशेष रूप से झारखंड के पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आएगा, जो अब उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर होते थे।
इन तीनों निर्णयों के माध्यम से झारखंड सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह नीतिगत रूप से सुदृढ़, जनकल्याणकारी और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। जहां एक ओर वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सेवाओं को भी पुनर्संरचित किया जा रहा है। आशा की जा रही है कि इन फैसलों का धरातल पर भी तेजी से प्रभाव दिखेगा और झारखंड की जनता को बेहतर शासन का अनुभव मिलेगा।



