अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ranchi News : रांची में एक बार फिर चर्चित हिंदूवादी नेता और बीजेपी समर्थक भैरव सिंह विवादों में आ गए हैं। चुटिया थाना क्षेत्र में पार्किंग ठेकेदारी को लेकर हुए एक विवाद में पुलिस ने उन्हें शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। भैरव सिंह को पहले हिरासत में लिया गया और फिर पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तारी की गई। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेजे जाने की तैयारी है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रांची के सुजाता चौक के पास पार्किंग ठेकेदारी को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई थी। इस विवाद के पीछे आर्थिक और राजनीतिक दोनों पहलू सामने आ रहे हैं। इसी मामले में चुटिया थाना में पूर्व में एक FIR दर्ज की गई थी, जिसमें भैरव सिंह को आरोपी बनाया गया था। शनिवार को वह एक अन्य मामले में पंडरा ओपी के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे थे, जहाँ से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
सिर्फ यही मामला नहीं, पहले भी रहे हैं विवादों में
भैरव सिंह का नाम पहले भी कई बार विवादों में रहा है। नवंबर 2024 में विधानसभा चुनाव के दौरान रांची जिला प्रशासन ने उन्हें 20 दिनों के लिए “जिलाबदर” कर दिया था। यह निर्णय रांची एसएसपी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था, जिसमें भैरव सिंह को एक “असामाजिक तत्व” बताया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, भैरव सिंह की गतिविधियाँ अक्सर सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करती हैं और क्षेत्र में कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन जाती हैं। उनके खिलाफ दर्ज प्रतिवेदन में कहा गया था कि वे लोगों को भड़काकर माहौल खराब करते हैं। यही नहीं, वर्ष 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को रोकने की कोशिश भी की थी, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और पुलिस की सख्ती
भैरव सिंह रांची में एक जाना-पहचाना नाम हैं और हिंदूवादी संगठनों में उनकी गहरी पैठ है। वहीं, उनके खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि अब कानून व्यवस्था से खिलवाड़ को लेकर प्रशासन सख्त रवैया अपना रहा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस की नजर पहले से ही उन पर थी, और शनिवार को मौके का फायदा उठाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
आगे क्या होगा
मेडिकल जांच के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या वे हालिया पार्किंग विवाद में केवल शामिल थे या इसे उकसाने में उनकी कोई भूमिका रही है। चुटिया थाना पुलिस के अनुसार, मामले में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह गिरफ्तारी एक राजनीतिक संदेश है या फिर कानून व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा।

