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रांची: झारखंड में घटिया देसी शराब की सप्लाई कर सरकारी खजाने को सेंध लगाने वाले छत्तीसगढ़ के बड़े शराब कारोबारी भूपेंद्रपाल सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार, 10 मार्च को झारखंड उच्च न्यायालय ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति संजय प्रसाद द्विवेदी की अदालत ने मामले की गंभीरता और राज्य को हुए राजस्व नुकसान को देखते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
षड्यंत्र और गुणवत्ता से समझौता
सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अदालत के सामने जो तथ्य रखे, वे काफी चौंकाने वाले हैं। एसीबी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने जोरदार दलील देते हुए कहा कि भूपेंद्रपाल सिंह ने महज मुनाफा कमाने के चक्कर में झारखंड की जनता की सेहत और राज्य के राजस्व के साथ खिलवाड़ किया। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत दूसरी कंपनी से मिलीभगत की और राज्य में ‘अनस्टैंडर्ड’ यानी मानकों से नीचे की देसी शराब की सप्लाई की।
राजस्व को करोड़ों की चपत
एसीबी ने कोर्ट को बताया कि भूपेंद्रपाल सिंह की कंपनी को झारखंड में तय मानकों के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाली देसी शराब की आपूर्ति का ठेका मिला था। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर घटिया शराब खपाई गई। इस हेरफेर से न केवल गुणवत्ता प्रभावित हुई, बल्कि झारखंड सरकार को मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व का भी भारी नुकसान हुआ है। एसीबी का तर्क था कि ऐसे गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में अगर अग्रिम जमानत दी गई, तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
कानूनी शिकंजा कसा
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के देसी शराब निर्माता भूपेंद्रपाल सिंह के खिलाफ एसीबी रांची ने कांड संख्या 9/2025 दर्ज कर जांच की कमान संभाली है। कोर्ट ने जांच एजेंसी की दलीलों में दम पाते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। इस मामले ने झारखंड के आबकारी विभाग और ठेकों के आवंटन में होने वाली संभावित गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया है।

