गांधीनगर | एजेंसी
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पीएम मोदी और सीएम भूपेंद्र पटेल के गढ़ में भाजपा की पकड़ अभेद्य है। 28 अप्रैल 2026 को आए परिणामों में भाजपा ने 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं और जिला पंचायतों में विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया है। 26 अप्रैल को हुए मतदान के बाद आज सुबह जैसे ही मतगणना शुरू हुई, भाजपा ने शुरूआती रुझानों से ही बढ़त बना ली थी। चार करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले इस चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा था, जिसमें भाजपा ने बाजी मार ली है।
प्रमुख निगमों के आंकड़ों की बात करें तो गांधीनगर नगर निगम की 52 सीटों में से 28 जीतकर भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। वडोदरा की 76 सीटों और जामनगर की 64 सीटों पर भी भाजपा जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुकी है। सूरत की 120 सीटों और अहमदाबाद की 192 सीटों पर भी कमल की लहर साफ देखी जा रही है। विशेष बात यह है कि राज्य के नौ नए गठित निगमों—नडियाद, मेहसाणा, वापी, पोरबंदर, सुरेंद्रनगर, नवसारी और मोरबी—में भी भाजपा ने जीत का परचम लहराया है।
विपक्ष के लिए ये नतीजे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। कांग्रेस को गांधीनगर और वडोदरा जैसे शहरों में महज चंद सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, पिछले चुनावों में अपनी धमक दिखाने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) का सूरत में खाता तक नहीं खुल सका और उनके प्रदेश महासचिव मनोज सोरठिया को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, कुछ जगहों पर भाजपा को भी व्यक्तिगत झटके लगे हैं, जैसे पूर्व विधायक भूपत भयाणी और पूर्व आईपीएस मनोज निनामा चुनाव हार गए। भुज नगरपालिका में AIMIM को 3 सीटें मिली हैं, जो एक अलग राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा करती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये नतीजे सीएम भूपेंद्र पटेल सरकार के ‘विकसित गुजरात’ मॉडल पर जनता की मुहर हैं। विकास और बुनियादी ढांचे के नाम पर मिले इस भारी जनसमर्थन ने विपक्षी एकता की हवा निकाल दी है। सूरत और अहमदाबाद जैसे शहरों में भाजपा की पकड़ और अधिक मजबूत हुई है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के मनोबल को सातवें आसमान पर ले जाएगी।
विपक्ष की हार और भाजपा का मनोबल: गुजरात अपडेट
मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच आए इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुजरात में फिलहाल भाजपा का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस और आप की रणनीतियां जमीन पर विफल साबित हुई हैं। भाजपा की इस जीत से कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और राज्यभर में ‘विजय उत्सव’ मनाया जा रहा है। अब सबकी नजरें शेष नगरपालिकाओं के पूर्ण परिणामों पर टिकी हैं।



