India News: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक फेरबदल का सिलसिला जारी है। कई राज्यों में अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच गुजरात में शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। यह चुनाव एक साल से लंबित था और पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए इसे अब टालना संभव नहीं था।
पंचायत चुनाव से पहले संगठनात्मक बदलाव
गुजरात में अगले साल की शुरुआत में पंचायत चुनाव होने वाले हैं, जो विधानसभा चुनाव से पहले लिटमेस टेस्ट माने जा रहे हैं। इसी वजह से पार्टी चाहती है कि प्रदेश की कमान ऐसे नेता को दी जाए, जो संगठन को मजबूत कर सके और मतदाता समीकरण संभाल सके। मौजूदा अध्यक्ष सीआर पाटिल दक्षिण गुजरात से आते हैं और पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अब अटकलें हैं कि नया अध्यक्ष सौराष्ट्र या उत्तर गुजरात से आ सकता है।
अध्यक्ष पद की दौड़ में बड़े नाम
गुजरात बीजेपी अध्यक्ष की रेस में कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और खेडा सीट से तीसरी बार सांसद देवुसिंह चौहाड़ का नाम प्रमुख है। इसके अलावा जगदीश पंचाल और पूर्व मंत्री व विधायक पूर्णेश मोदी भी दावेदार बताए जा रहे हैं। वहीं लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पाटीदार समाज से आते हैं, इसलिए संतुलन बनाने के लिए पार्टी ओबीसी चेहरे को अध्यक्ष बना सकती है।
सीआर पाटिल के कार्यकाल का असर
गुजरात में 2022 की विधानसभा चुनाव जीत का बड़ा श्रेय सीआर पाटिल को दिया गया था। हालांकि अब वे केंद्र में मंत्री हैं और प्रदेश संगठन को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे। यही कारण है कि अब नए अध्यक्ष की नियुक्ति जरूरी हो गई थी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पर क्यों है सस्पेंस
भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव इसलिए अटका हुआ है क्योंकि गुजरात और उत्तर प्रदेश में अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव नहीं हुए थे। पार्टी का संविधान कहता है कि जब तक राज्यों के संगठनात्मक चुनाव पूरे नहीं होंगे, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से सांसद हैं और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से। ऐसे में दोनों ही शीर्ष नेता चाहते हैं कि पहले अपने-अपने राज्यों में अध्यक्ष का चुनाव पूरा हो, उसके बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव करवाया जाए।
साफ होगा राष्ट्रीय अध्यक्ष का रास्ता
गुजरात में शनिवार को नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद भाजपा की संगठनात्मक तस्वीर और साफ हो जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष का चुनाव होगा। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि इन दोनों राज्यों में चुनाव पूरे होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने में आसानी होगी।
गुजरात के अध्यक्ष चुनाव से न केवल प्रदेश की राजनीति पर असर पड़ेगा बल्कि इसका सीधा प्रभाव राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी देखने को मिलेगा।



