Social News: एलन मस्क की एआई कंपनी Grok AI ने लगातार बढ़ते विवादों के बीच अपनी इमेज जेनरेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब ग्रोक महिलाओं को बिकिनी या किसी भी तरह के सेक्सुअल पोज में दिखाने वाली तस्वीरें बनाने से इनकार कर रहा है। प्लेटफॉर्म पर ऐसी किसी भी रिक्वेस्ट को सीधे रिजेक्ट किया जा रहा है।

यूजर्स को जवाब में ग्रोक की ओर से साफ संदेश दिया जा रहा है कि वह इस तरह की इमेज जनरेट नहीं कर सकता। कई मामलों में एआई यह भी स्पष्ट कर रहा है कि असली लोगों या उनसे मिलती-जुलती तस्वीरों को इस तरह पेश करना “नॉन-कंसेंशुअल मैनिपुलेशन” की श्रेणी में आता है, जो उसकी नई पॉलिसी के खिलाफ है।

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर फिलहाल यूनाइटेड किंगडम में देखा जा रहा है। वहां की सरकार ने हाल के दिनों में ग्रोक को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने संसद में चेतावनी दी थी कि अगर प्लेटफॉर्म ने खुद को नियंत्रित नहीं किया, तो उससे सेल्फ-रेगुलेशन का अधिकार छीना जा सकता है।

हालांकि नई पॉलिसी के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऑनलाइन यूजर्स और टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये पाबंदियां सिर्फ महिलाओं से जुड़ी इमेज रिक्वेस्ट्स पर लागू की गई हैं। पुरुषों या अन्य कैरेक्टर्स को बिकिनी या इसी तरह के कपड़ों में दिखाने वाली इमेजेस अब भी जेनरेट हो रही हैं। इसी वजह से ग्रोक पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने के आरोप लगने लगे हैं।

पिछले कुछ हफ्तों में ग्रोक को लेकर विवाद और गहरा गया था। कई यूजर्स ने बिना सहमति महिलाओं की डीपफेक जैसी तस्वीरें बनाईं, जिनमें सार्वजनिक हस्तियां भी शामिल थीं। इस पर भारत, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसी सरकारों ने कड़ा रुख अपनाते हुए नॉन-कंसेंशुअल कंटेंट रोकने और जरूरत पड़ने पर प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के निर्देश दिए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रोक की यह नई नीति एआई प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती सरकारी सख्ती का संकेत है। आने वाले समय में ऐसे नियम और ज्यादा सख्त हो सकते हैं, ताकि एआई के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।

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