Ranchi News : झारखंड अंगिभूत महाविद्यालय अनुबंध शिक्षकेतर कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से क्रमिक अनशन की शुरुआत कर दी है। रांची विश्वविद्यालय समेत राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े सैकड़ों कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए।
अनशनकारियों में कुमार सौरभ और बिसंभर कुमार सबसे पहले धरने पर बैठे। उनका कहना है कि वे बीते 10 से 15 वर्षों से अंगिभूत महाविद्यालयों के इंटरमीडिएट विभाग में कार्यरत रहे हैं। इन कर्मचारियों से सिर्फ इंटरमीडिएट का ही नहीं, बल्कि स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक से जुड़े सभी प्रशासनिक और तकनीकी कार्य कराए जाते थे। इनमें पुस्तकालय संचालन, प्रयोगशाला कार्य, अकाउंट सेक्शन, कंप्यूटर ऑपरेटर, एडमिशन क्लर्क, माली और सफाई कर्मियों जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।
संघ का आरोप है कि लगातार 132 दिनों तक राजभवन के पास धरना देने के बावजूद न तो सरकार और न ही किसी विश्वविद्यालय प्रशासन के पदाधिकारी उनकी समस्याएं सुनने आए। मजबूर होकर अब संघ ने क्रमिक अनशन का रास्ता अपनाया है।
मुख्य मांग समायोजन और रोजगार सुरक्षा
संघ का कहना है कि पहले भी महाविद्यालयों में कार्यरत डेली वेज कर्मियों को सरकार ने समायोजित कर नियुक्ति दी थी। इसी आधार पर अनुबंध शिक्षकेतर कर्मचारी भी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनके पक्ष में सकारात्मक निर्णय लेगी।
हम सभी झारखंडी, 1932 खतियान धारी
अनशनकारियों का कहना है कि वे सभी झारखंड के आदिवासी-मूलवासी और 1932 खतियानधारी हैं। इसलिए राज्य सरकार से उनकी अपेक्षा है कि उनके जीवनयापन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस क्रमिक अनशन के बाद भी सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो उन्हें अमरण अनशन का कठोर कदम उठाना पड़ेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।
पांच विश्वविद्यालयों से जुड़े कर्मचारी शामिल
इस आंदोलन में रांची विश्वविद्यालय रांची, विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय धनबाद, सिद्धू कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय मेदिनीनगर और कोल्हन विश्वविद्यालय चाईबासा के कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संघ के संयोजक कुमार सौरभ, अध्यक्ष जय मसीह तिग्गा, बिसंभर कुमार, सुनील श्रीवास्तव, अनिल मंडल, मनीषा कुमारी, अंगद मांझी, मीरा राम, अनु कुमारी, सोनी कुमारी, मंजेश महत्ता, दीपक मेहरा, हीना परवीन, पूजा कुमारी, नसरीन परवीन, कविता देवी समेत सैकड़ों कर्मियों ने भाग लिया। कर्मचारियों ने एक सुर में कहा कि अब यह लड़ाई उनके जीवन और भविष्य की है। जब तक समायोजन की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।



