India News: जालंधर जोनल ऑफिस की डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 31 दिसंबर 2025 को की गई तलाशी के बाद की गई, जिसमें आरोपी के ठिकानों से आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 14 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई।

ईडी के अनुसार यह मामला एस. पी. ओसवाल के चर्चित डिजिटल अरेस्ट से जुड़ा हुआ है और इसकी जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है। जांच की शुरुआत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना में दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी, जिसे बाद में नौ अन्य डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े मामलों के साथ जोड़ा गया।

ईडी की जांच में सामने आया कि एस. पी. ओसवाल को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे करीब 7 करोड़ रुपये वसूले। इसी गिरोह ने अन्य पीड़ितों से भी डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी के जरिए लगभग 1.73 करोड़ रुपये की ठगी की।

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जांच में खुलासा हुआ कि इस अवैध रकम को कई म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। इन खातों का संचालन रूमी कलिता और अर्पित राठौर द्वारा किया जा रहा था। गुवाहाटी निवासी रूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर ने मिलकर कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए किया।

ईडी के अनुसार फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स और रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में यह रकम जमा कराई गई, जिसके बाद इसे 200 से अधिक म्यूल खातों में ट्रांसफर किया गया। इन लेन-देन को अंजाम देने में अर्पित राठौर की भूमिका अहम रही।

जांच में यह भी सामने आया कि अर्पित राठौर विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में था और विदेशी नागरिकों को म्यूल खाते उपलब्ध कराकर अवैध धन को विदेशी अधिकार क्षेत्रों में भेजने में मदद करता था। बदले में उसे भारतीय रुपये और USDT क्रिप्टोकरेंसी में हिस्सा मिलता था।

इससे पहले 23 दिसंबर को रूमी कलिता को गिरफ्तार किया गया था। अर्पित राठौर को एसीजेएम, कानपुर के सामने पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर जालंधर लाया गया, जहां विशेष अदालत ने उसे 5 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। ईडी अब पूरे साइबर ठगी नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।

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