Ranchi : झारखंड में छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) का उल्लंघन कर आदिवासी जमीन खरीदने के मामले में पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का समेत कुल 10 आरोपितों पर सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी आरोपितों को न्याय प्रदान किया।

पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का को 7-7 साल की सजा और दो-दो लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है। वहीं, मामले के अन्य नौ दोषियों को 5-5 साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना दिया गया। अदालत ने शुक्रवार को 10 आरोपितों को दोषी करार दिया था, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था।

पूर्व मंत्री एनोस एक्का

सजा की सुनवाई सीबीआई के विशेष जज एसएन तिवारी की अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई, जिसमें सभी आरोपित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जुड़े थे। सीबीआई के लोक अभियोजक दविन्द्र पाल सूद ने पक्ष रखा।

पूर्व मंत्री एनोस एक्का पर सीएनटी की धारा 46 के तहत 16 साल पहले 1.18 करोड़ रुपए से अधिक की आदिवासी जमीन खरीदने का आरोप था। उनकी पत्नी मेनन एक्का के नाम से हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़ से अधिक, रांची के नेवरी में 4 एकड़ से अधिक और चुटिया के सिरम मौजा स्टेशन रोड में 9 डिसमिल जमीन खरीदी गई थी। सभी संपत्तियाँ मार्च 2006 से मई 2008 के बीच खरीदी गई थीं।

सजा सुनाने से पहले अदालत ने आरोपितों के खिलाफ सबूतों का विस्तार से परीक्षण किया। अन्य दोषियों में रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात, तीन सर्किल इंस्पेक्टर, राजस्व कर्मचारी और अन्य शामिल हैं। सजा पाने वाले दोषियों को तुरंत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।

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