Ranchi News : झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले 25 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

इससे पहले भी पीएमएलए की विशेष अदालत ने छवि रंजन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। विशेष अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद छवि रंजन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन यहां भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल के बरियातु क्षेत्र में सेना के कब्जे वाली जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है। ईडी की जांच में सामने आया कि इस घोटाले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जमीन की अवैध रजिस्ट्री कराई गई थी।

ईडी ने इस घोटाले में पूर्व डीसी छवि रंजन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है। चार्जशीट में छवि रंजन के अलावा चर्चित कारोबारी विष्णु अग्रवाल, बड़गाईं अंचल के राजस्व उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, फर्जी रैयत प्रदीप बागची, जमीन कारोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान, मोहम्मद सद्दाम, अमित अग्रवाल और दिलीप घोष के नाम भी शामिल हैं।

अदालत में ईडी की ओर से कहा गया कि आरोपितों ने सेना की भूमि का अवैध तरीके से सौदा कर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया है। इस मामले में जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और सबूत बरामद हुए हैं।

बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि छवि रंजन निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया गया है। साथ ही कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने ईडी के तर्कों को सही मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

इस फैसले के बाद अब छवि रंजन को जेल में ही रहना होगा। माना जा रहा है कि बचाव पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है। वहीं, ईडी का कहना है कि यह फैसला जांच एजेंसी के लिए बड़ी सफलता है और इससे जमीन घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों पर भी दबाव बढ़ेगा।

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