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U.P. News: उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर आंखें भर आती हैं। जैथरा थाना क्षेत्र के गांव नगला धीरज का एक 8 साल का मासूम अपनी मां का शव लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों से उसने बस इतना कहा, “डॉक्टर साहब, मेरी मम्मी का पोस्टमार्टम कर दो।” यह सुनते ही वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया।
बीमारी से जूझती मां, अकेला सहारा था बेटा
बताया गया कि बच्चे की मां गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। उनका इलाज एटा के मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। बच्चे के पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी और घर में मां-बेटे के अलावा कोई नहीं था। रिश्तेदार होते हुए भी किसी ने मदद नहीं की। मासूम ने बताया कि इलाज के दौरान चाचा और अन्य परिजन उसकी संपत्ति पर नजर रखे हुए थे, लेकिन इलाज के लिए न पैसे दिए, न साथ खड़े हुए।
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मां की तबीयत बिगड़ने पर बच्चा खुद ही उसे लेकर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकता रहा। फर्रुखाबाद से लेकर दिल्ली तक इलाज कराया। आठ दिन तक उसने अपनी मां की सेवा की, जैसे कोई बड़ा इंसान करता है। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। इलाज के दौरान मां की मौत हो गई।
पुलिस ने संभाला जिम्मा, बच्चे को मिला सहारा
मां की मौत के बाद बच्चा शव लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। जब यह बात पुलिस तक पहुंची तो जैथरा थाना प्रभारी तुरंत हरकत में आए। पुलिस ने बताया कि महिला की मौत बीमारी के कारण हुई है। प्रशासन अब मां का अंतिम संस्कार कराएगा। साथ ही बच्चे की सुरक्षा और आगे की देखभाल की जिम्मेदारी भी ली जाएगी।
इस मासूम की हिम्मत और संघर्ष ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। छोटी उम्र में उसने जो दर्द झेला, वह बड़े-बड़ों को तोड़ दे। अब उम्मीद है कि प्रशासन और समाज मिलकर इस बच्चे को नया सहारा देगा।



