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Ranchi News: झारखंड के चाईबासा में एक आदिवासी पिता द्वारा अपने चार साल के मासूम का शव झोले में भरकर घर ले जाने की हृदयविदारक खबर ने राजधानी रांची के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस मामले पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही की कोई जगह नहीं है और यदि इस घटना में जरा सी भी सच्चाई है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। मंत्री ने चाईबासा के सिविल सर्जन से पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
“मीडिया ट्रायल बर्दाश्त नहीं”: मंत्री ने जताई चिंता
स्वास्थ्य मंत्री ने इस पूरे मामले को लेकर एक नया पहलू भी सामने रखा है। उन्होंने आशंका जताई कि चाईबासा और पलामू जैसे संवेदनशील जिलों से लगातार नकारात्मक और भ्रामक खबरें फैलाकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। इरफान अंसारी ने कहा, “बिना पूरी जांच के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सोशल मीडिया या मीडिया ट्रायल के जरिए बदनाम करना उचित नहीं है। इससे दुर्गम क्षेत्रों में काम कर रहे हमारे डॉक्टरों का मनोबल गिरता है।” उन्होंने यह भी जांचने को कहा है कि क्या कुछ राजनीतिक ताकतें संगठित रूप से विभाग को निशाना बना रही हैं।
लापरवाही मिली तो होगी सख्त कार्रवाई: इरफान अंसारी
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए भी इस मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जांच में कोई कोताही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि जनता का सम्मान और स्वास्थ्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। यदि अस्पताल स्तर पर एंबुलेंस उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की गई या पिता को मना किया गया, तो कार्रवाई की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे किसी भी वास्तविक कमी की सूचना सीधे विभाग को दें ताकि सुधार किया जा सके, न कि केवल नकारात्मक माहौल बनाया जाए।
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मंत्री के इस कड़े रुख के बाद अब सबकी नजरें चाईबासा के सिविल सर्जन की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या यह वाकई सिस्टम की संवेदनहीनता थी या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है, यह जल्द ही साफ हो जाएगा।

