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New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत के दूरसंचार और अंतरिक्ष क्षेत्र की एक सुनहरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब डिजिटल रूप से एक सशक्त राष्ट्र बन चुका है, जहां गांव और शहर के बीच की डिजिटल दूरी लगभग खत्म हो गई है।
दूरसंचार: 5G का विस्तार और कनेक्टिविटी
पिछले एक दशक में भारत का दूरसंचार क्षेत्र (Telecom Sector) अभूतपूर्व गति से बढ़ा है।
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5G की उपलब्धता: देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में अब 5G सेवाएं उपलब्ध हैं, जो दुनिया के सबसे तेज रोलआउट में से एक है।
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दूरसंचार घनत्व: देश का कुल टेली-डेंसिटी 75.23% से बढ़कर अब 86.76% पर पहुंच गया है।
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डेटा सेंटर की ताकत: भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक बढ़कर 4 गीगावॉट होने का अनुमान है। वर्तमान में देश में 130 निजी और 49 सरकारी डेटा सेंटर सक्रिय हैं।
अंतरिक्ष: ‘स्पैडेक्स’ और श्रीहरिकोटा का शतक
अंतरिक्ष के क्षेत्र में वर्ष 2025 भारत के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है।
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SPADEX तकनीक: भारत स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग (Autonomous Satellite Docking) हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। यह तकनीक भविष्य के स्पेस स्टेशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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100वां प्रक्षेपण: 29 जनवरी 2025 को GSLV-F15 के जरिए NVS-02 उपग्रह का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से होने वाला 100वां मिशन था, जो इसरो (ISRO) की अटूट सफलता का प्रमाण है।
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सक्रिय संपत्तियां: भारत वर्तमान में अंतरिक्ष में 56 सक्रिय संपत्तियों का संचालन कर रहा है, जिसमें संचार, नेविगेशन और वैज्ञानिक उपग्रह शामिल हैं।
भविष्य की तकनीक: AI और IoT
सर्वेक्षण में कहा गया है कि सरकार का ध्यान अब ‘समावेशित, विकसित, त्वरित और सुरक्षा’ के चार स्तंभों पर है। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों के कारण भारत एक वैश्विक डेटा हब बनने की ओर अग्रसर है। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ने से अब छोटे स्टार्टअप्स को भी बड़े अवसर मिल रहे हैं।
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