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New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2026 पेश किया। इस सर्वेक्षण के अनुसार, भारत ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि सरकार की नीतियों के कारण देश के वंचित वर्गों तक वित्तीय सुरक्षा और पेंशन का लाभ पहुंचने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
पेंशन सेक्टर: NPS और APY की धूम
पेंशन फंड नियामक (PFRDA) द्वारा किए गए सुधारों का असर जमीन पर दिखने लगा है।
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NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम): 31 दिसंबर 2025 तक इसके ग्राहकों की संख्या 211.7 लाख पहुंच गई है। पिछले दशक में इसके एसेट्स (AUM) में 37.3% की वार्षिक दर (CAGR) से जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
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अटल पेंशन योजना (APY): 2016 में शुरू हुई इस योजना ने 43.7% की दर से ग्राहकों को जोड़ा है, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
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नई योजना: 2025 में शुरू हुई ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (UPS) को भी भविष्य के लिए एक मजबूत विकल्प बताया गया है।
बीमा क्षेत्र: स्वास्थ्य बीमा ने मोटर बीमा को पछाड़ा
आर्थिक सर्वेक्षण में एक दिलचस्प बदलाव सामने आया है। भारत के ‘गैर-जीवन’ (Non-Life) बीमा क्षेत्र में अब स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) सबसे बड़ा बिजनेस बन गया है। कुल घरेलू प्रीमियम में इसकी हिस्सेदारी 41% तक पहुंच गई है, जिसने मोटर बीमा को पीछे छोड़ दिया है। यह इस बात का संकेत है कि अब भारतीय नागरिक अपनी सेहत को लेकर अधिक सजग और सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं।
प्रमुख सुधार और राहत
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GST में छूट: जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी में दी गई छूट से आम जनता को बड़ी राहत मिली है, जिससे बीमा सेवाएं किफायती हो गई हैं।
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FDI सीमा: सरकार ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई (FDI) की सीमा को बढ़ाकर 100% कर दिया है, जिससे विदेशी निवेश और व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा।
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डिजिटलीकरण: ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा एक्ट, 2025’ के जरिए पूरी बीमा व्यवस्था को डिजिटल और लोकतांत्रिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जीवन बीमा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में कुल 6.3 लाख करोड़ रुपए के बेनिफिट्स का भुगतान किया है, जो देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती और नागरिकों के भरोसे को दर्शाता है।
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