Health News: फैट का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग मोटापा और बढ़ते वजन से डर जाते हैं, लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक हमारे शरीर में फैट सिर्फ नुकसान के लिए नहीं, बल्कि सही मात्रा में हो तो सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। खास बात यह है कि शरीर में दो तरह की वसा होती है – व्हाइट फैट और ब्राउन फैट, और दोनों की अपनी-अपनी अहम भूमिका है।

व्हाइट फैट को आमतौर पर “खराब फैट” समझ लिया जाता है, जबकि यह शरीर में ऊर्जा को स्टोर करने का काम करता है। यही फैट जरूरत पड़ने पर शरीर को ताकत देता है। दिक्कत तब शुरू होती है, जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। वहीं दूसरी तरफ ब्राउन फैट शरीर के लिए किसी पावर प्लांट से कम नहीं है। यह फैट जमा ऊर्जा को बर्न करता है और शरीर को एक्टिव बनाए रखता है।

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ब्राउन फैट, जिसे ब्राउन एडिपोज टिश्यू भी कहा जाता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर सर्दियों में यह शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। इसमें माइटोकॉन्ड्रिया की मात्रा ज्यादा होती है, जो कैलोरी को जलाकर ऊष्मा पैदा करते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों में ब्राउन फैट ज्यादा होता है, वे ठंड में भी ज्यादा एक्टिव रहते हैं।

इसके फायदे यहीं खत्म नहीं होते। ब्राउन फैट ब्लड शुगर को कंट्रोल करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में भी मदद करता है। रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों का वजन कम होता है, उनके शरीर में ब्राउन फैट की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

इसके उलट अगर ब्राउन फैट कम हो जाए, तो शरीर में व्हाइट फैट बढ़ने लगता है। इसका असर सीधा मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। थकान जल्दी महसूस होती है, शरीर सुस्त रहता है, ठंड ज्यादा लगती है और वजन बढ़ने लगता है। साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ जाता है।

ब्राउन फैट किसी खाने की चीज से सीधे नहीं मिलता, लेकिन इसे एक्टिव जरूर किया जा सकता है। इसके लिए नियमित एक्सरसाइज, एक्टिव लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी जरूरी है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि हल्की ठंड में वॉक या एक्सरसाइज करने से भी ब्राउन फैट सक्रिय होता है।

कुल मिलाकर फैट दुश्मन नहीं है। सही संतुलन में व्हाइट और ब्राउन फैट शरीर को ऊर्जा, गर्माहट और बेहतर सेहत देने का काम करते हैं। जरूरी है सही लाइफस्टाइल अपनाना और शरीर के इस नेचुरल सिस्टम को समझना।

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