घाघरा/गुमला :-घाघरा प्रखंड के मकरा गांव स्थित सॉलिटेयर एकेडमी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। शिक्षा के मंदिर में पढ़ाई के बजाय बच्चों से चंदा वसूली करवाने का गंभीर आरोप स्कूल प्रबंधन पर लगा है। मामला तब उजागर हुआ जब स्कूल यूनिफॉर्म पहने छोटे-छोटे बच्चे घाघरा बाजार में दुकानों पर घूम-घूमकर डोनेशन मांगते देखे गए।
स्थानीय लोगों द्वारा पूछताछ करने पर बच्चों ने बताया कि स्कूल प्रिंसिपल के निर्देश पर उन्हें एक कैंसर पीड़ित के इलाज के लिए आर्थिक सहायता जुटाने भेजा गया है। पढ़ाई के समय बच्चों का इस तरह बाजार में भटकना लोगों को खटक गया, वहीं बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे।
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू चंदा जुटाने के लिए तय किया गया ‘इनाम पैटर्न’ है। जानकारी के अनुसार, ₹249 से ₹349 तक चंदा लाने पर सिल्वर मेडल, ₹349 से ₹450 तक पर गोल्ड मेडल और इससे अधिक रकम पर विशेष गोल्ड मेडल व सर्टिफिकेट देने का प्रलोभन बच्चों को दिया गया। बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह सेवा भावना नहीं, बल्कि बच्चों को वसूली एजेंट की तरह इस्तेमाल करना है।
घटना को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका सवाल है कि क्या स्कूल को बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर भेजने की अनुमति थी और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी।
मामले पर सॉलिटेयर एकेडमी के प्रिंसिपल चंद्रकांत पाठक ने इसे जागरूकता कार्यक्रम बताया। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो ने कहा कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
घाघरा से दीनदयाल राम की रिपोट



