Health News: जब किसी को डायबिटीज (Diabetes) का पता चलता है, तो सबसे पहला दर्द ‘चाय की मिठास’ छूटने का होता है। मरीज अक्सर सफेद चीनी के विकल्प के तौर पर गुड़, देसी खांड या शहद को अपना लेते हैं, यह सोचकर कि ये नेचुरल हैं तो नुकसान नहीं करेंगे। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? न्यूट्रिशन विशेषज्ञों ने हाल ही में ग्लूकोज मीटर के जरिए एक दिलचस्प शोध किया है, जिसमें यह देखा गया कि एक कप चाय में अलग-अलग स्वीटनर डालने पर ब्लड शुगर में कितना उछाल आता है।
चीनी vs गुड़: कौन देता है ज्यादा बड़ा शुगर स्पाइक?
शोध की शुरुआत बिना चीनी वाली चाय से हुई, जिसने शुगर लेवल में केवल 3 एमजी/डीएल की मामूली बढ़ोतरी की। लेकिन जैसे ही चाय में एक चम्मच सफेद चीनी मिलाई गई, शुगर लेवल तेजी से बढ़ा। इसके मुकाबले जब गुड़ का इस्तेमाल किया गया, तो ब्लड शुगर में 16 एमजी/डीएल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि गुड़ अनरिफाइंड होता है और इसमें कुछ मिनरल्स होते हैं, इसलिए यह सफेद चीनी से थोड़ा बेहतर है, लेकिन पूरी तरह ‘सेफ’ नहीं है।
देसी खांड और शहद: चौंकाने वाले हैं नतीजे
हैरानी की बात यह रही कि ‘देसी खांड’ का प्रदर्शन गुड़ से भी बेहतर रहा। एक चम्मच खांड वाली चाय से शुगर स्पाइक मात्र 13 एमजी/डीएल तक पहुँचा। वहीं, जब दो चम्मच शहद मिलाया गया, तो ब्लड शुगर में 18 एमजी/डीएल का उछाल आया। यानी शहद का असर गुड़ और खांड दोनों से अधिक रहा। इन आंकड़ों से यह साफ है कि अगर आप रिफाइंड चीनी के विकल्प तलाश रहे हैं, तो देसी खांड और गुड़ तुलनात्मक रूप से थोड़े कम नुकसानदायक हैं।
एक्सपर्ट की राय: क्या है सबसे सही रास्ता?
न्यूट्रिशन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप दिनभर में केवल एक कप चाय पीते हैं, तो गुड़ या देसी खांड एक बेहतर चुनाव हो सकते हैं। लेकिन अगर आपकी शुगर पहले से ही अनियंत्रित रहती है या आप दिन में 3-4 कप चाय पीते हैं, तो कोई भी स्वीटनर आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। उनके अनुसार, ‘नो शुगर’ यानी बिना मिठास वाली चाय ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। याद रखें, चाहे स्वीटनर कितना भी नेचुरल क्यों न हो, वह कैलोरी और ग्लूकोज में इजाफा जरूर करता है।



