Lifestyle Desk: आजकल बच्चों में मधुमेह यानी डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, डाइट में फलों और हरी सब्जियों की कमी से यह बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। हालत यह है कि 10 या 11 साल की छोटी सी उम्र में ज्यादातर बच्चे अधिक वजन या मोटापे का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनमें डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हर दिन दो तिहाई से अधिक लोग अपने खाने में फलों और हरी सब्जियों का कम इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनमें डायबिटीज टाइप 2 होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वयस्क हर दिन फलों और सब्जियों के तीन या उससे कम हिस्से का सेवन करते हैं, जिसकी वजह से करीब 12 मिलियन लोग टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आ सकते हैं।

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एक ताजा सर्वे में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि 66 प्रतिशत वयस्क हर दिन बहुत ही कम मात्रा में फल और सब्जियां खाते हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत लोग पहले से ही टाइप 2 डायबिटीज के मरीज हैं। हेल्थ चैरिटी का कहना है कि अगर लोग अपने रहन-सहन में थोड़ा बदलाव लाएं, तो डायबिटीज के पांच में से तीन मामलों को होने से रोका जा सकता है।

हर कोई जानता है कि उन्हें सप्ताह में पांच दिन फल और सब्जियां खाना चाहिए, लेकिन सर्वे बताता है कि यह संदेश लोगों तक ठीक तरह से नहीं पहुंच पा रहा है। यह जानना वाकई खतरनाक है कि अधिकांश लोग अभी भी पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियों के सेवन से काफी दूर हैं। इतना ही नहीं, कई लोगों को तो इस बारे में जानकारी तक नहीं है कि उन्हें कितनी मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए।

एक और बड़ी समस्या यह है कि लोगों को बंद डिब्बों में मिलने वाले खाद्य पदार्थों (डिब्बाबंद खाना) में मौजूद चीनी की सही मात्रा का पता नहीं है। हैरानी की बात यह है कि दो तिहाई लोगों को यह भी नहीं मालूम कि एक छोटे डिब्बे वाले बेक्ड बीन्स में पांच चम्मच तक चीनी शामिल हो सकती है।

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सर्वे में लगभग दस में से छह लोगों ने कहा कि वे ज्यादा सब्जियां खाना तो चाहते हैं, लेकिन 23 प्रतिशत का कहना है कि वे काफी महंगी होती हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इन्हें बनाने में समय बहुत ज्यादा लगता है। लेकिन याद रखें, सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

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