रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। राहुल दुबे गैंग के बाद अब पुलिस के रडार पर ‘पांडे गिरोह’ आया है। रामगढ़ पुलिस ने बुधवार को पांडे गिरोह के दो खूंखार शूटरों को दबोचकर व्यवसायियों और ठेकेदारों के बीच फैले डर को कम करने की दिशा में कामयाबी हासिल की है।

आधी रात का सन्नाटा और पुलिस की चौकसी

रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह गिरफ्तारी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। बुधवार की तड़के करीब 2:30 बजे, जब पूरा शहर सो रहा था, रामगढ़ थाना क्षेत्र के अरगड्डा रोड पर पुलिस ‘एंटी क्राइम चेकिंग’ अभियान चला रही थी। तभी बड़का चुम्मा की ओर से एक पल्सर बाइक पर दो संदिग्ध युवक आते दिखे। पुलिस को देखते ही उन्होंने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा।

हथियारों और रंगदारी का काला खेल

पकड़े गए अपराधियों की पहचान कैंटोनमेंट स्टाफ क्वार्टर निवासी बादल कुमार और पतरातू के सोनू नंदी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान पुलिस के भी होश उड़ गए; इनके पास से दो लोडेड देशी पिस्तौल और 9 एमएम की तीन जिंदा गोलियां बरामद हुईं।

पूछताछ में अपराधियों ने कबूला कि वे पांडे गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। उनका काम रामगढ़ के बड़े ठेकेदारों, डीओ होल्डर्स और व्यापारियों को धमकाकर लेवी (रंगदारी) वसूलना था। उन्होंने स्वीकार किया कि जो व्यापारी पैसे देने से इनकार करते थे, उन्हें डराने के लिए वे गोलीबारी करने की फिराक में ही घर से निकले थे। पुलिस की सतर्कता ने शहर में होने वाली वारदात को टाल दिया।

टीम की सफलता

इस सफल ऑपरेशन में हेडक्वार्टर डीएसपी चंदन कुमार वत्स, रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे और कई जांबाज सब-इंस्पेक्टरों (रोशन बाड़ा, सुमंत कुमार राय आदि) की अहम भूमिका रही। एसपी ने साफ संदेश दिया है कि जिले में किसी भी अपराधी गिरोह को पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों की पल्सर बाइक और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनसे गिरोह के अन्य नेटवर्क को खंगालने की कोशिश की जा रही है।

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