Beijing, (China): हाल ही में चीन के वैज्ञानिकों ने एक नई और आधुनिक तकनीक के जरिए टाइप-2 डायबिटीज के मरीज के सफल इलाज का बड़ा दावा किया है। इस खबर ने दुनियाभर में यह उम्मीद जगा दी है कि भविष्य में डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का स्थायी इलाज मुमकिन हो सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती शोध के चरण में है और इसे पूरी तरह सुरक्षित मानने से पहले बड़े स्तर पर परीक्षण होना बाकी हैं। चीन के शंघाई शांगजेंग अस्पताल और पेकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर स्टेम सेल तकनीक पर आधारित एक नया तरीका विकसित किया है।
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शोधकर्ताओं ने स्टेम सेल की मदद से कृत्रिम ‘पैंक्रियाटिक इसलेट सेल्स’ तैयार की हैं। बता दें कि पैंक्रियाज की यही इसलेट कोशिकाएं शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन बनाने का काम करती हैं। टाइप-2 डायबिटीज में अक्सर शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर बना हुआ इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं कर पाता, जिससे शुगर लेवल बिगड़ जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 59 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज में इन नई कोशिकाओं का ट्रांसप्लांट किया गया, जिसके बाद उसके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में शानदार सफलता मिली है।
स्टेम सेल ऐसी विशेष कोशिकाएं होती हैं जिनमें शरीर की किसी भी अंग की नई कोशिका बनने की अद्भुत क्षमता होती है। इस तकनीक में स्टेम सेल से स्वस्थ पैंक्रियाटिक इसलेट सेल्स तैयार कर मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित की जाती हैं। ये नई कोशिकाएं शरीर के अंदर जाते ही इंसुलिन बनाना शुरू कर देती हैं और जरूरत के हिसाब से उसे रिलीज करती हैं, जिससे ब्लड शुगर संतुलित रहता है। यदि यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रहती है, तो मरीज की इंसुलिन इंजेक्शन और महंगी दवाओं पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।
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हालांकि, विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक हर मरीज के लिए एक जैसी प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। कई मामलों में शरीर नई प्रत्यारोपित कोशिकाओं को स्वीकार नहीं करता, जिससे उपचार का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा, यह तकनीक अभी सीमित ट्रायल तक ही पहुंची है, इसलिए इसके लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों पर गहरा अध्ययन जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक यह तकनीक पूरी तरह प्रमाणित नहीं हो जाती, तब तक डायबिटीज के मरीजों को अपनी नियमित दवाएं, संतुलित आहार और व्यायाम जारी रखना चाहिए। फिलहाल संतुलित जीवनशैली ही इस बीमारी को काबू में रखने का सबसे बेहतर जरिया है।



