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Raipur (Chhattisgarh): प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को पूरे विश्व में एनटीडी दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का अभिप्राय यह है कि विश्व के सभी लोग एनटीडी (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज़ेज़) के नियंत्रण और उन्मूलन के प्रति पूरी प्रतिबद्धता से जनांदोलन के रूप में कार्य करें। इसी क्रम में आज , राज्य में भी एनटीडी दिवस मनाया गया और लोगों को नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज़ के बारे में जागरूक किया गया।
छत्तीसगढ़ के संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेन्द्र पामभोई ने बताया कि कि एनटीडी, शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रभावित करने वाले रोगों का एक समूह है, जोकि अभी भी नेग्लेक्टेड कही जाती हैं और विश्व में लगभग 1.7 अरब लोग कम से कम किसी 1 नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज़ से प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं। एनटीडी में लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) विसेरल लीशमैनियासिस (कालाजार), लेप्रोसी (कुष्ठ रोग), डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्पदंश, रेबीज़ जैसे रोग शामिल होते हैं। पूरी दुनिया में प्रत्येक वर्ष बहुत लोग इन रोगों से प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने जानकारी दी, कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार विश्व में हर 5 में से 1 व्यक्ति एनटीडी से ग्रसित हैं। भारत दुनिया भर में प्रत्येक प्रमुख एनटीडी के लिए पहले स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि एनटीडी में कई ऐसी बीमारियाँ हैं जो इनसे ग्रसित व्यक्ति हर जगह, हर किसी की शिक्षा, पोषण और आर्थिक विकास पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। इनके नियंत्रण और उन्मूलन के कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने से आर्थिक विकास, समृद्धि एवं लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। एनटीडी को नेग्लेक्टेड यानि उपेक्षित समझा जाता है मगर इन रोगों के नियंत्रण और उन्मूलन को सुनिश्चित करने के लिए अब इन रोगों पर स्पॉटलाइट लाने का समय है। इनसे सम्बंधित कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाए और इनके उन्मूलन से सम्बंधित गतिविधियाँ मिशन मोड पर संपादित की जाए।
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छत्तीसगढ़ के राज्य कार्यक्रम अधिकारी (फाइलेरिया) डॉ. जितेन्द्र कुमार ने बताया कि राज्य में एनटीडी के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए राज्य स्तर से ग्राम स्तर तक सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर फाइलेरिया या हाथीपांव एक गंभीर रोग है जो कि संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में फाइलेरिया रोग से मुक्ति के उद्देश्य से सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) की शुरुआत आगामी 10 फ़रवरी 2026 से राज्य के कुल 18 जिलों के 65 विकासखंडों में यह की जायेगी। इनमें से 15 जिलों में तीन दवाओं आईवरमेक्टिन, डीईसी एवं एल्बेंडाजोल के साथ (आईडीए) तथा 3 जिलों में डीईसी एवं एल्बेंडाजोल (डीए) के माध्यम से लगभग 1 करोड़ 58 लाख से अधिक लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी।
इसी प्रकार एनटीडी में शामिल अन्य दूसरी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने और उन्हें इन बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा अंतर विभागीय समन्वय के साथ हर स्तर पर प्रयास किये जा रहें हैं। सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महोदय की अध्यक्षता में राज्य टास्क फ़ोर्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सामूहिक दवा सेवन के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हेतु उपस्थित सभी विभागों से अपेक्षा की गई।

