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Madhya Pradesh (India): हर साल 30 जनवरी को पूरी दुनिया में विश्व एनटीडी दिवस (World NTD Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य उन 21 बीमारियों (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज़) के प्रति जागरूकता फैलाना और उनके उन्मूलन के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना है, जो अक्सर समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों को प्रभावित करती हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य को फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों से मुक्त करने के लिए कमर कस ली है।
10 फरवरी से शुरू होगा ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी, डॉ. हिमांशु जायसवार ने बताया कि राज्य के फाइलेरिया प्रभावित 8 जिलों के 12 विकासखंडों में आगामी 10 फरवरी से बड़े पैमाने पर दवा वितरण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है:
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आईडीए (IDA) रणनीति: छतरपुर, पन्ना, मऊगंज, टीकमगढ़ और उमरिया में तीन दवाएं (आईवरमेक्टिन, डीईसी एवं एल्बेंडाजोल) खिलाई जाएंगी।
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डीए (DA) रणनीति: निवाड़ी, भिंड और शहडोल में दो दवाएं (डीईसी एवं एल्बेंडाजोल) दी जाएंगी।
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प्रक्रिया: प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों के घर जाकर अपने सामने यह दवाएं खिलाएंगे।
क्या है एनटीडी और क्यों है यह खतरनाक? एनटीडी उन बीमारियों का समूह है जो शारीरिक विकलांगता के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ाती हैं। इसमें शामिल प्रमुख रोग हैं:
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लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव)
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विसेरल लीशमैनियासिस (कालाजार)
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कुष्ठ रोग (लेप्रोसी), डेंगू, चिकुनगुनिया और रेबीज़।
भारत और मध्य प्रदेश की स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर 5 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी एनटीडी से प्रभावित है। भारत इन बीमारियों के मामले में वैश्विक स्तर पर पहले स्थान पर है। डॉ. जायसवार के अनुसार, राज्य सरकार ग्राम स्तर तक सुनियोजित रणनीति बनाकर इन रोगों को खत्म करने का प्रयास कर रही है। इन बीमारियों का उन्मूलन न केवल स्वास्थ्य में सुधार लाएगा, बल्कि आर्थिक समृद्धि और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देगा।
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले अभियान में नागरिक सक्रिय रूप से भाग लें और स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा का सेवन कर खुद को और अपने परिवार को फाइलेरिया जैसी लाइलाज बीमारी से सुरक्षित रखें।

