New Delhi — कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्वास्थ्य सलाह देने वाले टूल ‘चैटजीपीटी हेल्थ’ की विश्वसनीयता को लेकर एक नए अध्ययन ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया शोध के मुताबिक, यह एआई टूल कई गंभीर चिकित्सा स्थितियों में आपातकालीन स्तर का सही आकलन करने में पूरी तरह असफल रहा है। अध्ययन में पाया गया कि यह प्रणाली आधे से ज्यादा इमरजेंसी मामलों में जरूरी तत्काल चिकित्सा सहायता की बजाय कम प्राथमिकता वाली सलाह देती है, जो मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन अमेरिका के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व डॉ. अश्विन रामास्वामी ने किया। यह शोध 23 फरवरी 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। गौरतलब है कि यह हेल्थ टूल इसी साल 7 जनवरी 2026 को आम उपयोगकर्ताओं के लिए लॉन्च किया गया था। शोधकर्ताओं ने 21 अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों से जुड़े 60 क्लिनिकल परिदृश्य तैयार किए थे। कुल 960 प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण में एआई का प्रदर्शन काफी चौंकाने वाला रहा। परिणामों में एक “उल्टे यू आकार” का पैटर्न सामने आया, जिसमें एआई मध्यम स्तर की बीमारियों को तो पहचान सका, लेकिन बहुत गंभीर स्थितियों में उसकी सटीकता बेहद कम रही।

अध्ययन में पाया गया कि यह टूल स्ट्रोक जैसी स्थितियों को तो पहचान लेता है, लेकिन ‘स्वर्ण-मानक’ आपात स्थितियों के 52 फीसदी मामलों में इसने चूक कर दी। एआई ने डायबिटिक कीटोएसिडोसिस और सांस लेने में दिक्कत जैसे जानलेवा मामलों में भी मरीजों को 24 से 48 घंटे के अंदर डॉक्टर से मिलने की सलाह दी, जबकि असलियत में उन्हें तुरंत अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने की जरूरत थी।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि यह अध्ययन कृत्रिम उदाहरणों पर आधारित था और वास्तविक परिस्थितियों में अभी और परीक्षण की जरूरत है। दूसरी ओर, ओपनएआई ने इस स्वतंत्र शोध का स्वागत करते हुए कहा है कि मॉडल को लगातार अपडेट किया जा रहा है और यह अध्ययन वास्तविक उपयोग के हर पहलू को नहीं दर्शाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध एआई आधारित प्रणालियों की सीमाओं को उजागर करता है और बिना डॉक्टरी सलाह के इन पर पूरी तरह निर्भर होना खतरनाक हो सकता है।

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