रांची: राजधानी के निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाना अब उन्हें महंगा पड़ने वाला है। मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिलास्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने शिक्षा माफिया और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों को कड़ा संदेश दिया है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन स्कूलों ने ‘झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम-2017’ का उल्लंघन कर फीस बढ़ाई है, उन्हें इसी सत्र में उस राशि को ‘एडजस्ट’ करना होगा।

92 स्कूलों में पाया गया नियमों का उल्लंघन

बैठक के दौरान पिछले तीन वर्षों की फीस वृद्धि का विश्लेषण किया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच के दायरे में आए 129 स्कूलों में से 92 स्कूलों ने फीस वृद्धि के नियमों को ताक पर रखा था। उपायुक्त ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित स्कूल अगले 15 दिनों के भीतर ‘फी-एडजस्टमेंट प्लान’ तैयार करें और बढ़ा हुआ पैसा छात्रों के मासिक शुल्क में समायोजित करें।

PTA गठन और अनुपस्थिति पर कड़ा रुख

प्रशासनिक सख्ती केवल फीस तक सीमित नहीं है। जिले के 20 ऐसे स्कूल जिन्होंने अब तक अभिभावक शिक्षक संघ (PTA) का गठन नहीं किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, बैठक से नदारद रहने वाले स्कूलों पर भी उपायुक्त ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुपस्थित स्कूलों को तुरंत नोटिस जारी किया जाए और उनका ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ किया जाए ताकि पता चल सके कि वे कागजों पर चल रहे हैं या वास्तव में।

RTE के तहत 25% सीटों पर नामांकन अनिवार्य

जहां एक तरफ प्रशासन सख्त दिखा, वहीं ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE)’ के तहत वंचित बच्चों को दाखिला देने वाले स्कूलों की सराहना भी की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि इस सत्र में भी 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए जल्द ही ऑनलाइन लॉटरी आयोजित की जाएगी।

जनगणना 2027 : बच्चों के जरिए अभिभावकों तक पहुंचेगा संदेश

बैठक के अंत में उपायुक्त ने ‘डिजिटल स्वगणना’ (Self Enumeration) को लेकर प्राचार्यों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों को इसके बारे में शिक्षित करें ताकि वे अपने माता-पिता को पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर जानकारी दर्ज करने के लिए प्रेरित कर सकें।

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