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Health News: आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं में ‘रसौत’ (जिसे रसंजना भी कहा जाता है) को एक शक्तिशाली औषधि का दर्जा प्राप्त है। दारुहरिद्रा की जड़ और छाल से तैयार यह अर्क दिखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके औषधीय गुण जटिल बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें मौजूद ‘बर्बेरिन’ (Berberine) नाम का तत्व एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक की तरह काम करता है।
बवासीर और पेट रोगों में राहत
रसौत का सबसे प्रभावी उपयोग खूनी बवासीर में देखा जाता है। यह न केवल रक्तस्राव (Bleeding) को रोकता है, बल्कि मलाशय की सूजन को भी कम करता है। आयुर्वेद में इसे नीम और हरड़ के चूर्ण के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है, जिससे पाचन दुरुस्त होता है और कब्ज की समस्या खत्म होती है।
डायबिटीज और लीवर के लिए सुरक्षा कवच
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शुगर कंट्रोल: रसौत में मौजूद सक्रिय तत्व इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है। हालांकि, दवा ले रहे मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
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पीलिया और लीवर: यह लीवर को डिटॉक्स (विषैले पदार्थों को बाहर निकालना) करने में मदद करती है। पीलिया के दौरान शहद के साथ इसका सेवन कमजोरी दूर करने और पाचन शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
आंखों और त्वचा के लिए भी लाभकारी
रसौत का उपयोग केवल खाने तक सीमित नहीं है। गुलाब जल के साथ इसकी कुछ बूंदें आंखों की लालिमा और जलन को शांत करती हैं। वहीं, त्वचा पर इसका लेप लगाने से पुराने घाव और दाग-धब्बे तेजी से भरने लगते हैं। मुंह के छालों या गले में संक्रमण होने पर रसौत के काढ़े से कुल्ला करना तुरंत राहत देता है।
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सावधानी भी है जरूरी
रसौत की तासीर और औषधीय प्रभाव काफी तेज होता है। अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसके सेवन से पहले डॉक्टर की अनुमति जरूर लेनी चाहिए। याद रखें, सही औषधि तभी काम करती है जब उसे सही मात्रा और सही सलाह के साथ लिया जाए।



