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Lahore, (Pakistan): पाकिस्तान के भीतर सुलग रही आजादी की चिंगारी अब एक औपचारिक वैधानिक दस्तावेज का रूप ले चुकी है। बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने ‘बलूचिस्तान लिबरेशन चार्टर’ जारी किया है, जिसे आजाद बलूचिस्तान का अंतरिम संविधान कहा जा रहा है। इस चार्टर ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना मुख्यालय) में खलबली मचा दी है, क्योंकि इसमें एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की गई है जो पाकिस्तान के ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ के बिल्कुल विपरीत है।
धर्मनिरपेक्षता पर जोर: पाकिस्तान की नींव पर प्रहार: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चार्टर की सबसे बड़ी विशेषता इसका धर्मनिरपेक्ष (Secular) होना है। बलूच नेता मरियार बलोच द्वारा सार्वजनिक किए गए इस दस्तावेज में स्पष्ट कहा गया है कि आजाद बलूचिस्तान में धर्म और राजनीति अलग-अलग होंगे। यह उस पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती है जिसकी पहचान ही मजहब के आधार पर बनी है। चार्टर के अनुसार, नए बलूचिस्तान में ना जिहाद की राजनीति होगी और ना ही मजहबी कट्टरता को स्थान मिलेगा।
हिंदू, सिख और ईसाइयों को समान अधिकार: जहां पाकिस्तान में अक्सर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और जबरन धर्मांतरण की खबरें आती हैं, वहीं बलूच संविधान अल्पसंख्यकों के लिए ‘सुरक्षित स्वर्ग’ का वादा करता है। इसमें हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों को पूर्ण सुरक्षा और समान नागरिक अधिकार देने की बात कही गई है। यह मॉडल सीधे तौर पर पाकिस्तान के वर्तमान सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कटघरे में खड़ा करता है।
रणनीतिक संदेश: हिंदी और मराठी में भी अनुवाद: इस चार्टर को तैयार करने का श्रेय बलूच राष्ट्रवादी नेता हिरबयार मर्री को जाता है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दस्तावेज का हिंदी, मराठी, गुजराती और पंजाबी समेत 11 प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया है। जानकारों का मानना है कि यह भारत की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक अपनी आवाज पहुंचाने की एक सोची-समझी कोशिश है। पाकिस्तान इस बात से भी बौखलाया हुआ है कि इस अनुवाद कार्य में भारतीय समर्थकों की मदद ली गई है, जो उसके लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है।

