अध्यात्म डेस्क | एजेंसी
सनातन धर्म में अक्षय तृतीया की तिथि का एक विशिष्ट स्थान है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘अक्षय’ फल देने वाला माना जाता है, जिसका अर्थ है वह पुण्य या लाभ जो कभी नष्ट न हो। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ होता है, यानी किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने या विशेष मुहूर्त निकालने की जरूरत नहीं होती। लोग इस दिन सोना, चांदी, भवन, वाहन और संपत्ति की खरीदारी को सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।
हालांकि, जहां एक ओर नई वस्तुओं का घर में आगमन शुभ है, वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें इस दिन से पहले घर से बाहर कर देना चाहिए। माना जाता है कि ये वस्तुएं घर में नकारात्मक ऊर्जा लाती हैं और मां लक्ष्मी के आगमन में बाधा डालती हैं।
इन सामानों को तुरंत करें घर से बाहर:
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बंद पड़ी घड़ियां: समय का रुक जाना प्रगति में बाधा का संकेत है। यदि घर में ऐसी घड़ियां हैं जो खराब हो चुकी हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें। ये नकारात्मकता को आकर्षित करती हैं।
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फटे-पुराने और गंदे कपड़े: फटे हुए कपड़े आर्थिक तंगी और कमजोर भाग्य का कारण बनते हैं। अक्षय तृतीया से पहले अलमारियों की सफाई करें और ऐसे कपड़ों को घर से निकाल दें।
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सूखे पौधे और मुरझाए फूल: घर में जीवंतता का होना जरूरी है। सूखे हुए इंडोर प्लांट्स या गुलदस्ते में रखे मुरझाए फूल दुर्भाग्य का प्रतीक होते हैं। इस शुभ दिन पर घर को हरे-भरे पौधों से सजाएं।
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टूटी-फूटी झाड़ू: हिंदू धर्म में झाड़ू को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। टूटी हुई झाड़ू न केवल सफाई में बाधा डालती है, बल्कि दरिद्रता को भी निमंत्रण देती है। अक्षय तृतीया पर नई झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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टूटी चप्पलें और कबाड़: घर के किसी कोने में जमा पुराना प्लास्टिक, लोहे या स्टील का कबाड़ और टूटे हुए जूते-चप्पल नकारात्मकता फैलाते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घर को अव्यवस्था और बेकार सामान से मुक्त रखें।
अक्षय तृतीया का दिन नई शुरुआत और समृद्धि का संकल्प लेने का है। घर की सफाई और इन अनुपयोगी वस्तुओं का त्याग आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली के द्वार खोल सकता है।
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