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Health Desk: अगर आप भी कमर में अकड़न, पीठ या जोड़ों के दर्द को मामूली थकान समझकर नजरंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। यह लापरवाही आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जोड़ों के दर्द के कारण रात में तीन-चार बजे आपकी नींद खुल जाती है और आप असहज महसूस करते हैं, तो यह स्पांडिलाइटिस की शुरुआत हो सकती है। यह बीमारी सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हृदय, फेफड़े और आंत जैसे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी अपनी चपेट में ले लेती है।
स्पांडिलाइटिस दरअसल एक प्रकार का गठिया रोग है, जो रीढ़ की हड्डी से शुरू होकर गर्दन, जांघ, घुटने और टखनों तक फैलता है। इसे नजरंदाज करने से बड़ी आंत में सूजन (कोलाइटिस) और आंखों में गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा हो जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं है; 45 साल से कम उम्र के नौजवानों और महिलाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ‘एंकिलोसिंग स्पांडिलाइटिस’ में कशेरूक में इतनी तेज पीड़ा होती है कि मरीज का चलना-फिरना दूभर हो जाता है।
बच्चों में भी यह बीमारी ‘जुवेनाइल स्पांडिलोअर्थ्राइटिस’ के रूप में पाई जाती है, जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों को निशाना बनाती है। इसमें बच्चों को लगातार थकान, आलस्य और निचले हिस्से के जोड़ों में सूजन बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुख्य रूप से जेनेटिक म्युटेशन के कारण होता है। हमारे शरीर में मौजूद ‘एचएलए-बी’ जीन जब सही तरीके से काम नहीं कर पाता, तो शरीर का सुरक्षा तंत्र अपनी ही हड्डियों और जोड़ों को दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगता है।
अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान होने पर इसका इलाज आसान है। ‘एचएलए-बी 27’ नामक खून की जांच और एमआरआई के जरिए इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में फिजियोथेरेपी और सही दवाइयों से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, जबकि बेहद गंभीर स्थितियों में ही सर्जरी की नौबत आती है। इसलिए जोड़ों के दर्द को मामूली न समझें और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
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