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New Delhi: भारतीय वायुसेना की ताकत में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा होने जा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर 3.25 लाख करोड़ रुपए की मेगा डील अंतिम चरण में है। 17 फरवरी से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तीन दिवसीय भारत यात्रा शुरू हो रही है, जिसमें इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे पर आधिकारिक मुहर लगने की पूरी संभावना है।
दुनिया देखेगी ‘सुपर राफेल’ का दम
इस सौदे की सबसे बड़ी खासियत इसमें शामिल 24 ‘सुपर राफेल’ (F-5 श्रेणी) विमान हैं। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल F-3 श्रेणी के हैं, जो 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान हैं। लेकिन नए लड़ाकू विमान F-4 और F-5 पीढ़ी के होंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय मानकों के अनुसार F-5 राफेल असल में छठी पीढ़ी के जेट होंगे, जो अमेरिका के F-35 और रूस के सुखोई-57 को भी पीछे छोड़ देंगे।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
रिपोर्ट के मुताबिक, दसॉ एविएशन से 18 विमान पूरी तरह तैयार स्थिति में मिलेंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इन विमानों में 60 प्रतिशत कलपुर्जे स्वदेशी होंगे, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को बड़ी मजबूती मिलेगी। सौदे के तहत 88 सिंगल सीटर और 26 डबल सीटर विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे।
बॉर्डर पर बढ़ेगी भारत की धमक
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों की तैनाती से बॉर्डर एरिया में एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इसके अलावा, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने नौसेना के लिए 6 अमेरिकी बोइंग P8-I सर्विलांस एयरक्राफ्ट और कॉम्बैट मिसाइलों के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है। इन सभी रक्षा सौदों की कुल लागत करीब 3.60 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है।
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