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Nawada (Bihar): जिले के तमाम अंचल कार्यालयों में सोमवार से ताले लटक गए हैं। नवादा जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों के अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राज्यस्तरीय संघ के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ना शुरू हो गया है। दाखिल-खारिज (Mutation), जाति-आय प्रमाण पत्र और भूमि विवाद निपटारे जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह बंद हो गए हैं।
कैबिनेट के उस एक फैसले ने सुलगाई विरोध की आग
कौआकोल सीओ मनीष कुमार और राजस्व अधिकारी अनीश कुमार ने बताया कि यह हड़ताल 29 जनवरी को बिहार मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) द्वारा लिए गए एक निर्णय के विरोध में है। दरअसल, कैबिनेट ने भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पदनाम को बदलकर ‘अनुमंडल राजस्व अधिकारी’ करने और बिहार प्रशासनिक सेवा में 101 नए पद सृजित करने का फैसला लिया है।
प्रमोशन के रास्ते बंद होने का डर
राजस्व अधिकारियों का तर्क है कि अब तक राजस्व अधिकारी ही प्रमोट होकर डीसीएलआर और एडीएम (ADM) बनते थे। लेकिन नए पदों के सृजन और पदनाम बदलने से उनके भविष्य की पदोन्नति (Promotion) के मार्ग बंद हो सकते हैं। सीओ मनीष कुमार के अनुसार, यह निर्णय ‘बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010’ की भावना के खिलाफ है और इससे अधिकारियों का मनोबल बुरी तरह गिर गया है।
जनता पर पड़ रही दोहरी मार
एक तरफ पहले से ही म्यूटेशन अपील और भूमि विवादों का बोझ अधिकारियों पर अधिक था, वहीं अब इस हड़ताल ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। नवादा के अंचल कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग जरूरी कागजातों के लिए भटकने को मजबूर हैं। संघ का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनके हितों की रक्षा नहीं करती, तब तक यह ‘कलम बंद’ हड़ताल जारी रहेगी।
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