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Patna: बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन नीतीश सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था की एक बेहद चमकदार तस्वीर पेश की है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा पेश किए गए ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ के अनुसार, बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से 3.3 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है। सरकार का अब अगला लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में बिहार को पूरी तरह ‘विकसित राज्य’ की श्रेणी में खड़ा करना है।
राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे निकला बिहार
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान मूल्य पर बिहार की विकास दर 13.1 प्रतिशत रही है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा महज 9.8 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने गर्व के साथ बताया कि तमिलनाडु के बाद बिहार देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बन गया है। सरकार ने पिछले दशक में बिजली, पानी और सड़कों का जो बुनियादी ढांचा तैयार किया था, उसका परिणाम अब राज्य की जीडीपी में साफ दिख रहा है।
प्रति व्यक्ति आय में शानदार बढ़ोत्तरी
सर्वेक्षण की सबसे उत्साहजनक खबर आम आदमी की जेब से जुड़ी है। वर्ष 2020-21 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय जो 46,412 रुपये थी, वह 2024-25 में बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्तमान मूल्य पर 9.91 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।
अब औद्योगिकरण पर विशेष जोर
वित्त मंत्री ने भविष्य का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि सरकार का ध्यान अब ‘इंडस्ट्रियलाइजेशन’ (Industrialization) पर होगा। “संपन्न बिहार, समृद्ध बिहार” के संकल्प के साथ सरकार का लक्ष्य प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना है। आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के खर्च का दो-तिहाई हिस्सा (लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये) विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च हो रहा है, जो एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का संकेत है।
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