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Health News: हम जीवित रहने के लिए खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत मात्रा में खाया गया पौष्टिक भोजन भी शरीर के लिए बोझ बन जाता है? आयुर्वेद में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को संचालित करने वाला एक ‘अनुशासन’ माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भोजन सही मात्रा और संतुलन के साथ लिया जाता है, तो वह शरीर के लिए किसी जादुई औषधि (Medicine) की तरह काम करता है।
पेट के 4 हिस्से: आयुर्वेद का अद्भुत विज्ञान
आयुर्वेद का मानना है कि अपने आमाशय (Stomach) को गले तक भर लेना बीमारियों को न्यौता देना है। इसके लिए एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी नियम बताया गया है:
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आधा भाग (50%): ठोस भोजन के लिए (अनाज, सब्जियां, दाल)।
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एक चौथाई भाग (25%): तरल पदार्थों के लिए (छाछ, दाल का पानी या गुनगुना पानी)।
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एक चौथाई भाग (25%): इसे ‘रिक्त स्थान’ यानी खाली छोड़ना चाहिए।
यह खाली स्थान पेट के भीतर ‘अग्नि’ और ‘वायु’ के संचार के लिए जरूरी है, जो भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करते हैं।
कैसे पहचानें कि आपने ज्यादा खा लिया है?
अगर भोजन के तुरंत बाद आपको भारीपन महसूस होता है, आलस आता है, नींद आती है या गैस और कब्ज की समस्या होती है, तो यह संकेत है कि आपने अपनी प्राकृतिक सीमा (Hunger limit) को पार कर लिया है। इसके विपरीत, सही मात्रा में खाने के बाद शरीर हल्का महसूस करता है, मन शांत रहता है और ठीक 4 घंटे बाद दोबारा प्राकृतिक भूख महसूस होने लगती है।
रात का भोजन और शरीर की मरम्मत
आयुर्वेद में रात के भोजन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रात में हल्का भोजन करना चाहिए क्योंकि सोते समय हमारा शरीर अपनी कोशिकाओं की मरम्मत (Cellular Repair) करता है। यदि पाचन तंत्र भारी भोजन को पचाने में ही व्यस्त रहेगा, तो शरीर की आंतरिक सफाई और मरम्मत का काम अधूरा रह जाएगा।
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